बेटियों की शिक्षा और सपनों को मिला सहारा, प्रशासन ने रुकवाई नाबालिग शादियां
सुकमा: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत प्रशासनिक मुस्तैदी का एक बड़ा असर देखने को मिला है। यहाँ प्रशासन की संयुक्त टीम ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए दो अलग-अलग गांवों में होने वाले बाल विवाहों को रुकवा दिया। अधिकारियों ने संवेदनशीलता और सूझबूझ का परिचय देते हुए दोनों परिवारों को कम उम्र में शादी करने के गंभीर कानूनी और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों से अवगत कराया, जिसके बाद परिजनों ने अपनी बेटियों की शादी को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने पर लिखित सहमति दे दी।
पहला मामला: धुरगुड़ा-पोगाभेज्जी में पारंपरिक विवाह पर रोक
पहला वाकया धुरगुड़ा-पोगाभेज्जी गांव का है। यहाँ स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं के तहत एक 17 वर्षीय नाबालिग बालिका का विवाह तय कर उसकी रस्में निभाई जा रही थीं। जैसे ही इसकी भनक जिला प्रशासन को लगी, महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU), चाइल्ड हेल्पलाइन और स्थानीय पुलिस विभाग के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम तुरंत गांव पहुँची।
टीम ने लड़की के माता-पिता और वर पक्ष के बुजुर्गों को एक साथ बिठाकर 'बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006' के कड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। प्रशासन की समझाइश और कानूनी कार्रवाई के डर के बाद, दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से लड़की के बालिग होने तक विवाह को टालने का फैसला किया।
दूसरा मामला: सिरसेट्टी में भोज की तैयारी के बीच पहुँची टीम
दूसरा मामला सिरसेट्टी के अंतर्गत आने वाले पांडुरूपारा का है, जहाँ आगामी 15 जून को एक अन्य नाबालिग बच्ची का विवाह होना तय हुआ था। घर में शादी का माहौल था, मेहमान आ चुके थे और सामुदायिक भोज (शादी के खाने) की बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही थीं।
ऐन वक्त पर प्रशासनिक अमला मौके पर धमक पड़ा। अधिकारियों ने परिजनों को समझाया कि इतनी कम उम्र में शादी करने से बच्ची के स्वास्थ्य, उसकी शिक्षा और मानसिक विकास पर कितना गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। काउंसलिंग के बाद माता-पिता को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने शादी के सभी कार्यक्रमों को तुरंत रोक दिया।
परिजनों से भरवाया गया घोषणा-पत्र
प्रशासन ने भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति या दोबारा गुपचुप शादी की कोशिश को रोकने के लिए दोनों ही मामलों में वर और वधू पक्ष के जिम्मेदारों से कानूनी घोषणा-पत्र भरवाया है और मौके पर ही पंचनामा तैयार किया।
प्रशासनिक संदेश: मामले पर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ कानून के डर से नहीं, बल्कि लगातार संवाद, जन-जागरूकता और ग्रामीण समाज के सहयोग से ही बाल विवाह जैसी कुरीतियों को जड़ से खत्म किया जा सकता है। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई की पूरे इलाके में सराहना हो रही है।
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