सर्वोच्च नेतृत्व पर सवाल, तेहरान में सत्ता संघर्ष गहराया
तेहरान: ईरान की सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक गोपनीय पत्र के लीक होने से बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। इस खुलासे के बाद देश के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है। लीक हुए दस्तावेजों में दावा किया गया है कि ईरानी राजनयिक, अमेरिका के साथ स्विट्जरलैंड में चल रही उच्च स्तरीय बातचीत में उन सीमाओं और दायरों को पार कर गए हैं, जिन्हें खुद सर्वोच्च नेता ने तय किया था। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान की स्थिति को संवेदनशील बना दिया है।
कट्टरपंथी सांसद का दावा और मोजतबा खामेनेई की 11 शर्तें
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान के एक कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने एक इंटरव्यू में सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अमेरिका से वार्ता को लेकर मोजतबा खामेनेई द्वारा लिखित बेहद संवेदनशील और गुप्त पत्र देखे हैं, और देश के राजनयिक उन शर्तों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं। इस बयान के बाद इंटरव्यू को बीच में ही रोककर रिकॉर्ड से हटा दिया गया। लीक पत्र के मुताबिक, मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका के सामने 11 सख्त शर्तें रखी थीं, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख थीं:
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अमेरिका से आर्थिक मुआवजे की मांग और सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना।
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यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के अधिकार को बरकरार रखना और फ्रीज संपत्तियों की तत्काल बहाली।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर ईरान का पूर्ण एकाधिकार स्थापित करना, वहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल टैक्स वसूलना और दुश्मन देशों के जहाजों पर पाबंदी लगाना।
आंतरिक कलह के पीछे कट्टरपंथियों की बेचैनी
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस लीक के पीछे ईरान के भीतर सक्रिय कट्टरपंथी धड़े की गहरी राजनीतिक बेचैनी छिपी है। कट्टरपंथी ताकतों को डर है कि यदि अमेरिका के साथ कोई भी समझौता सफल हो जाता है, तो देश के भीतर उदारवादी गुट बेहद मजबूत हो जाएंगे। इससे उन विचारधारा-आधारित सत्ता केंद्रों का प्रभाव कम हो जाएगा जो पश्चिमी देशों के साथ टकराव की बदौलत ही वर्षों से सत्ता का मलाईदार हिस्सा बने हुए हैं। विश्लेषक बाबक दोरबेइकी का मानना है कि कट्टरपंथी ताकतें संघर्ष और तनाव के माहौल में ही पनपती हैं, और अमेरिका के साथ शांति या समझौते का कोई भी प्रयास उनके राजनीतिक अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है।
सर्वोच्च नेता के रुतबे की परीक्षा और अंतरराष्ट्रीय वार्ता पर असर
हालांकि वर्तमान में मोजतबा खामेनेई की गद्दी को कोई सीधा या खुला खतरा नहीं दिख रहा है, क्योंकि कोई भी गुट उनके खिलाफ सीधे बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा है। इसके उलट, सभी गुट खुद को खामेनेई की शर्तों का सच्चा रक्षक साबित करने की होड़ में लगे हैं। लेकिन इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि मोजतबा को अपने पिता की कुर्सी तो मिल गई है, पर विभिन्न विरोधी गुटों के बीच संतुलन बनाने और अपनी बात को निर्विवाद रूप से मनवाने का हुनर पाना अभी बाकी है। यह आंतरिक विद्रोह ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बीच दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष तरीकों से वार्ता आगे बढ़ रही थी, जिसे इस आंतरिक कलह ने तगड़ा झटका दिया है।
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