संघर्ष की सियासत: फडणवीस कैबिनेट में भुजबल की एंट्री
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता और विधायक छगन भुजबल ने मंगलवार को राजभवन में राज्य के कैबिनेट मंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद जब दोबारा महायुति सरकार का गठन हुआ था, तब नए मंत्रिमंडल में भुजबल को जगह नहीं दी गयी थी। हालांकि, अब छह महीने बाद एक बार फिर भुजबल की मंत्रिमंडल में वापसी हुई है। नाशिक जिले की येवला सीट से विधायक छगन भुजबल ओबीसी समुदाय के प्रमुख नेता माने जाते हैं। हाल ही में धनंजय मुंडे के मंत्री पद से इस्तीफे के बाद मंत्रिमंडल में एक स्थान खाली हुआ था। इसलिए भुजबल को खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग मिलने की उम्मीद है, उन्होंने इससे पहले इस विभाग की जिम्मेदारी उद्धव ठाकरे और फिर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पिछली सरकारों में उठाई थी।
मंत्री पद नहीं मिलने की वजह से भुजबल नाराज हो गए थे। आहत भुजबल ने पार्टी नेतृत्व के समक्ष अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर की थी और कहा था कि पिछले साल विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के ओबीसी मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाने के बावजूद उन्हें दरकिनार कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने पार्टी के कई कार्यक्रमों से दूरी बना ली थी, लेकिन पार्टी अध्यक्ष अजित पवार और कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने संगठनात्मक कार्यों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। इसके अलावा, दो बार राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में उनके नामांकन पर विचार न किए जाने से भी वे नाराज थे।
एनसीपी को मंत्रिमंडल में एक मजबूत और दमदार ओबीसी चेहरे की जरूरत थी, खासकर तब जब एक अन्य ओबीसी नेता धनंजय मुंडे को मार्च में राज्य विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बीड के सरपंच संतोष देशमुख की नृशंस हत्या के सिलसिले में इस्तीफा देना पड़ा था। मुंडे के पास खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग था और उनके जाने के बाद उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इसे संभाला।
भुजबल का फडणवीस कैबिनेट में शामिल होना एनसीपी के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को चार महीने में स्थानीय और नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है। मराठा आरक्षण समर्थक कार्यकर्ता मनोज जरांगे के खिलाफ एक बड़े संघर्ष में ओबीसी आरक्षण की सुरक्षा के लिए वे सबसे आगे रहे हैं। इसके अलावा, भुजबल जाति आधारित जनगणना के प्रबल समर्थक रहे हैं, जिसे केंद्र ने हाल ही में मंजूरी दी है।
दिलचस्प रहा है छगन भुजबल का सियासी सफर
शिवसेना की स्थापना से ही राजनीति में सक्रिय रहे छगन भुजबल मुंबई महानगरपालिका (BMC) में नगरसेवक के रूप में निर्वाचित हुए थे। वह मुंबई के मेयर भी रह चुके है। हालांकि, शिवसेना प्रमुख स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे से मतभेद होने के बाद वह 1991 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। फिर 1999 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का दामन थाम लिया। 2008 से 2010 के बीच कुछ महीनों के लिए वे महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री भी रहे। महाराष्ट्र सदन घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 14 मार्च 2016 को उन्हें गिरफ्तार किया गया था। जेल से बाहर आने के बाद एनसीपी ने एक बार फिर उनका राजनीतिक पुनर्वास करते हुए 2019 में गठित महाविकास आघाड़ी सरकार में उन्हें मंत्री बनाया। 2023 में एनसीपी में विभाजन के बाद छगन भुजबल शरद पवार का साथ छोड़कर अजित पवार के साथ आ गए।
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