महान विभूतियों के निधन पर सम्मान प्रकट करना होता है राष्ट्रीय शोक
नई दिल्ली। हाल ही में कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी के निधन पर भारत में एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया। इसके बाद कई लोगों का ध्यान इस महत्वपूर्ण परंपरा ने खींचा है। भारत में आखिर राष्ट्रीय शोक होता क्या है, हर कोई यह जानने को उत्सुक है। मालूम हो कि राष्ट्रीय शोक देश के प्रति असाधारण योगदान देने वाली महान विभूतियों के निधन पर या किसी बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी के समय गहरा सम्मान और संवेदना प्रकट करने का एक आधिकारिक तरीका है। यह एक ऐसा समय होता है जब पूरा देश एक साथ दुख और सम्मान की अभिव्यक्ति करता है, और इस दौरान किसी भी स्तर की खुशी या जश्न का माहौल नहीं मनाया जाता है। सरकारी भवनों पर फहरा रहा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी झुका दिया जाता है। पहले इसके नियम बहुत सीमित थे, लेकिन समय के साथ सरकार ने इसमें बदलाव किए हैं, जिससे इसकी व्यापकता बढ़ी है। राष्ट्रीय शोक की घोषणा केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से की जाती है, और इसके पीछे कुछ निर्धारित प्रोटोकॉल और कारण होते हैं।
कुछ संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के निधन पर राष्ट्रीय शोक घोषित करना अनिवार्य होता है, जैसे वर्तमान राष्ट्रपति, वर्तमान प्रधानमंत्री और वर्तमान उपराष्ट्रपति। इनके निधन पर पूरे देश में राष्ट्रीय शोक मनाया जाता है। वहीं, पूर्व पदाधिकारियों जैसे पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व मुख्यमंत्रियों के निधन पर भी केंद्र सरकार अपने विवेक से राष्ट्रीय शोक की घोषणा कर सकती है। इसके अतिरिक्त, अगर किसी ऐसी असाधारण शख्सियत का निधन हो, जिसने देश के लिए अभूतपूर्व योगदान दिया हो, जैसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी या महान गायिका लता मंगेशकर, तो उनके सम्मान में भी राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाता है। किसी बड़े हादसे, आतंकी हमले या गंभीर प्राकृतिक आपदा में भारी संख्या में नागरिकों की जान जाने पर भी सरकार राष्ट्रीय शोक या संवेदना दिवस घोषित कर सकती है। राष्ट्रीय शोक के दौरान कई नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
सबसे प्रमुख नियम यह है कि देश की सभी महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों, संसद, राष्ट्रपति भवन और विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों पर तिरंगा आधा झुका दिया जाता है। हालांकि, इसमें एक विशेष नियम यह भी है कि यदि राष्ट्रीय शोक की अवधि के दौरान ही 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) या 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) आता है, तो तिरंगे को आधा नहीं झुकाया जाता है, बल्कि केवल उसी इमारत पर झुकाया जाता है जहां दिवंगत शख्स का पार्थिव शरीर रखा हो। इसके अलावा, राष्ट्रीय शोक के दिनों में सरकार की तरफ से आयोजित किए जाने वाले सभी आधिकारिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए जाते हैं। मंत्रियों या सरकारी अधिकारियों की तरफ से किए जाने वाले समारोह, उद्घाटन या आधिकारिक पार्टियां जैसे राष्ट्रपति भवन में होने वाले रिसेप्शन स्थगित कर दिए जाते हैं। पूर्व के नियमों के अनुसार राष्ट्रीय शोक के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता था, लेकिन 1997 में केंद्रीय कैबिनेट ने नियमों में बदलाव किया। नए नियमों के अनुसार अब राष्ट्रीय शोक के दौरान सरकारी दफ्तरों या स्कूलों में छुट्टी नहीं होती है, कामकाज सामान्य रूप से चलता है। इसमें अपवाद केवल यह है कि वर्तमान राष्ट्रपति या वर्तमान प्रधानमंत्री के निधन के दिन ही राजकीय अंत्येष्टि के समय सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जा सकता है।
राष्ट्रीय शोक के साथ ही कई बार दिवंगत विभूति का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान यानी स्टेट फ्यूनरल के साथ किया जाता है। इसके तहत पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे में लपेटा जाता है और सेना या पुलिस के जवानों की तरफ से तोपों या बंदूकों की सलामी (गन सैल्यूट) दी जाती है। पहले यह सम्मान केवल वर्तमान या पूर्व राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों को मिलता था, लेकिन अब राज्य सरकारें अपने स्तर पर राजनीति, कला, विज्ञान या समाजसेवा में अद्वितीय योगदान देने वाले नागरिकों को भी राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दे सकती हैं, जिनमें पद्म पुरस्कार विजेता या बड़े राजनेता शामिल होते हैं।
राशिफल 14 सितम्बर 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बेमेतरा जिले को दी 183 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
रायगढ़ के रामलीला मैदान में 14 से 23 सितंबर तक सजेगा चक्रधर समारोह का भव्य मंच
कठिनाईयों और संघर्ष के बावजूद अपनी पहचान और गौरव को बनायें रखने वाले सिंधी समाज पर सभी को गर्व : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर छत्तीसगढ़ की गूंज, देश-दुनिया के सामने खुली पर्यटन संभावनाओं की नई राह
सेवा संकल्प अभियान 2026: हुनर को मिल रही नई उड़ान’
पूरे क्षेत्र को स्वास्थ्य सेवाओं से कवर करें, शत-प्रतिशत टीकाकरण एवं गर्भवती महिलाओं का समय पर पंजीयन एवं एएनसी जांच सुनिश्चित हो: उप मुख्यमंत्री शुक्ल
"हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार" के ध्येय वाक्य को चरितार्थ कर रहा है मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
लगातार दो वर्ष देश में सर्वाधिक रिकवरी दर, यह किसानों की मेहनत का परिणाम है - उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई को मिशन के रूप में लेकर कार्य करें-उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
केन बेतवा लिंक परियोजना के क्रियान्वयन से बुंदेलखंड क्षेत्र में आयेगी खुशहाली : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
प्रदेश की लाडली बहना लाभ लेने वाली नहीं, अब बन रही है लाभ कमाने वाली: मुख्यमंत्री डॉ यादव
नेशनल लोक अदालत में लगभग 577584 मामले निराकृत
नए रंग विकल्पों के साथ सुजुकी जिक्सर रेंज लॉन्च
एसयूवी एलिवेट को नए अवतार में पेश करने की तैयारी