तंगहाली से जूझता पाकिस्तान, कमजोर सिस्टम ने बढ़ाई मुश्किलें
नई दिल्ली। पाकिस्तान एक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जहां सरकारी आंकड़ों के अनुसार गरीबी की समस्या लगातार गहराती जा रही है। नवीनतम रिपोर्टों से यह स्पष्ट होता है कि देश केवल मौद्रिक गरीबी का सामना नहीं कर रहा है, बल्कि 'संस्थागत गरीबी' की गिरफ्त में भी आ गया है। यह एक ऐसी स्थिति है जहां मजबूत, अनुमानित और लचीले संस्थानों का अभाव है, जो आय की सुरक्षा कर सकें, अवसरों को सक्षम बना सकें और झटकों को अवशोषित कर सकें।
मौद्रिक गरीबी में वृद्धि
पाकिस्तान के योजना आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, मौद्रिक गरीबी का प्रतिशत 2018-19 में 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 28.9 प्रतिशत हो गया है। इसका अर्थ है कि देश की एक बड़ी आबादी जीवन की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रही है। मौद्रिक गरीबी आय या व्यय की उस कमी को कहते हैं, जहां कोई व्यक्ति या परिवार जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक न्यूनतम आय स्तर (गरीबी रेखा) से नीचे रहता है।
ग्रामीण और शहरी गरीबी का विभाजन
गरीबी का यह संकट देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी 36 प्रतिशत से अधिक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 17 प्रतिशत को पार कर गई है। राष्ट्रीय गिनी सूचकांक, जो आय असमानता को मापता है, 28.4 से बढ़कर 32.7 हो गया है, जो विशेष रूप से सिंध जैसे कुछ प्रांतों में स्थिति के और बिगड़ने का संकेत देता है।
आय असमानता और आर्थिक अस्थिरता
योजना आयोग की रिपोर्टों से पता चलता है कि हालांकि नाममात्र की आय में वृद्धि हुई है, लेकिन मुद्रास्फीति के आय से अधिक होने के कारण वास्तविक आय में गिरावट आई है। इससे प्रांतों के बीच असमानता बढ़ी है और देश व्यापक आर्थिक अस्थिरता व जलवायु झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है। यह कमजोर नीति-कल्याण संचरण तंत्र का संकेत देता है।
संस्थागत गरीबी के आयाम
संस्थागत गरीबी कई रूपों में प्रकट होती है, जिनमें शामिल हैं:
- नीति अस्थिरता: बार-बार नीतियों में बदलाव से अनिश्चितता का माहौल बनता है।
- कमजोर श्रम औपचारिकता: अधिकांश श्रमिक अनौपचारिक क्षेत्र में हैं, बिना अनुबंध, बीमा या उत्पादकता वृद्धि के अवसरों के।
- नाजुक स्थानीय शासन: जिला-स्तरीय संस्थान, जहां सेवाएं प्रदान की जाती हैं, प्रशासनिक रूप से कमजोर और वित्तीय रूप से निर्भर हैं।
- सामाजिक सुरक्षा में स्वचालित स्थिरीकरण का अभाव: संकट के समय में लोगों को सहारा देने वाली प्रणालियाँ प्रभावी नहीं हैं।
- जवाबदेही के बिना योजना: योजनाओं का निर्माण तो होता है, लेकिन उनके कार्यान्वयन और परिणामों के लिए कोई जवाबदेही तय नहीं की जाती।
सुधार के लिए सुझाव
रिपोर्टों में संस्थागत गरीबी से निपटने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:
- ऊर्जा टैरिफ सुधार: निम्न आय वर्ग के लिए पूर्व-निर्धारित क्षतिपूर्ति तंत्र शामिल किया जाना चाहिए।
- कृषि बीमा का संस्थागतकरण: यह दाता-निर्भरता के बजाय एक स्थायी प्रणाली के रूप में स्थापित होना चाहिए।
- लचीलापन फ्रेमवर्क: पंचवर्षीय योजनाओं को, या कम से कम उनके पूरक के रूप में, ऐसे लचीलापन फ्रेमवर्क द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए जो व्यापक आर्थिक स्थिरता, श्रम बाजार, जलवायु अनुकूलन और असमानता की निगरानी को एकीकृत करें।
आर्थिक जाल और भविष्य की चुनौतियां
एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने उत्पादक विकास पर अल्पकालिक प्रवासी प्रेषण और विदेशी सहायता को प्राथमिकता देकर खुद को एक खतरनाक आर्थिक जाल में फंसा लिया है। प्रवासी प्रेषण अब सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा हैं और निर्यात आय के बराबर हैं। यह प्रणाली की विफलताओं को छुपाता है, जैसे कि निष्क्रिय कारखाने, उच्च बेरोजगारी और उत्पादक कार्यबल का अल्प-उपयोग।
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