एनडीए बहुमत के नए स्तर के करीब, विपक्ष में चिंता बढ़ी
नई दिल्ली: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले देश की राजनीति में एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की एक बड़ी और बेहद खास रणनीति पर काम कर रही है। इस राजनीतिक हलचल का सबसे सीधा और बड़ा असर विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन पर पड़ता दिख रहा है, जहां कई प्रमुख क्षेत्रीय दलों के भीतर एक बड़ी टूट की स्थिति पैदा हो गई है।
इस बड़े घटनाक्रम में सबसे तगड़ा झटका तृणमूल कांग्रेस (TMC) को लगा है। पार्टी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावती तेवर अपनाते हुए एक अलग गुट बना लिया है और वे राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी (NCPI) में विलय कर सत्ताधारी गठबंधन को समर्थन देने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही, महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के भी 6 से 7 सांसदों के टूटने और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली असली शिवसेना में शामिल होने की अटकलें और सियासी सरगर्मियां बेहद तेज हो चुकी हैं।
लोकसभा का पूरा गणित और दो-तिहाई का लक्ष्य
वर्तमान में लोकसभा की 3 सीटें खाली होने के बाद, किसी भी बड़े संवैधानिक संशोधन या विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पास कराने के लिए सदन में 360 वोटों की आवश्यकता है। तृणमूल कांग्रेस के इस बागी धड़े के साथ आने के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का आंकड़ा बढ़कर 318 सांसदों तक पहुंच गया है।
सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, इस जादुई आंकड़े को छूने के लिए सरकार की बातचीत डीएमके (DMK) के साथ भी अंदरखाने चल रही है। यदि डीएमके के 22 और उद्धव गुट के बागी 6 सांसद भी इस पाले में आ जाते हैं, तो यह आंकड़ा आसानी से 346 तक पहुंच जाएगा। इसके बाद दो-तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक बचे हुए 14 सांसदों के अंतर को पाटने के लिए भाजपा की नजर विपक्षी गठबंधन में शामिल कुछ अन्य छोटे और क्षेत्रीय दलों पर टिकी हुई है।
राज्यसभा में भी मजबूत घेराबंदी की तैयारी
संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में किसी भी विधेयक को दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने के लिए 164 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। फिलहाल उच्च सदन में एनडीए (NDA) के पास कुल 150 सीटें मौजूद हैं।
इस 14 सीटों के फासले को कम करने के लिए सरकार की रणनीति बेहद स्पष्ट है। इसके तहत डीएमके के 8 राज्यसभा सांसदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, तृणमूल कांग्रेस में मची इस बड़ी राजनीतिक बगावत के बाद खाली होने वाली सीटों पर उपचुनावों के माध्यम से नए चेहरों को लाकर सरकार राज्यसभा में भी दो-तिहाई के आंकड़े को पार करने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
इन दो बड़े विधेयकों को पास कराना है मुख्य उद्देश्य
राजनीतिक गलियारों और कूटनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, संसद के दोनों सदनों में इतनी बड़ी जोड़-तोड़ और कड़े कूटनीतिक प्रयासों के पीछे सरकार का एक बहुत बड़ा और दूरगामी लक्ष्य छिपा हुआ है। सरकार का मुख्य उद्देश्य आगामी मानसून सत्र के दौरान देश के राजनीतिक परिदृश्य को बदलने वाले दो सबसे महत्वपूर्ण कानूनों—'महिला आरक्षण विधेयक' और 'देशव्यापी परिसीमन विधेयक'—को पूर्ण और भारी बहुमत के साथ संसद से पारित कराना है। यही वजह है कि मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ही देश के सियासी समीकरण पूरी तरह से बदलते हुए नजर आ रहे हैं।
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