NCERT Textbook Update: नए चैप्टर, हटे पुराने विषय और क्यों मचा बवाल?
नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-1’ जारी की है। इस नई पाठ्यपुस्तक में आपातकाल, चुनाव आयोग की भूमिका, भारतीय ज्ञान परंपरा, वेदों और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं की स्थिति को दर्शाने के लिए मनुस्मृति के एक श्लोक का भी उल्लेख किया गया है। एनसीईआरटी द्वारा किताबों में किए जाने वाले बदलाव अक्सर चर्चा और विवादों का कारण बनते रहे हैं। इस बार भी नए पाठ्यक्रम के जारी होते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां विपक्षी दल इसकी आलोचना कर रहे हैं, वहीं सरकार से जुड़े लोग और शिक्षा मंत्रालय इसका स्वागत कर रहे हैं।
कक्षा 9 की नई किताब में जोड़े गए मुख्य विषय
नई पुस्तक में वर्ष 1975-77 के दौरान देश में लगाए गए राष्ट्रीय आपातकाल पर एक पूरा अलग खंड शामिल किया गया है। इसमें आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और आंतरिक अशांति के आधार पर इसके लागू होने के कारणों की व्याख्या की गई है। इस खंड में मौलिक अधिकारों के निलंबन, प्रेस सेंसरशिप, राजनीतिक नेताओं की गिरफ्तारी के साथ-साथ जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और बिहार-गुजरात के जन आंदोलनों का विशेष रूप से जिक्र है। पुस्तक में भारतीय ज्ञान परंपरा के तहत ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद की जानकारी दी गई है और बताया गया है कि वैदिक काल में महिलाओं का स्थान अत्यंत उच्च और आदरणीय था, जिसके प्रमाण के रूप में मनुस्मृति का वह श्लोक उद्धृत किया गया है जिसमें कहा गया है कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं। इसके अलावा, देश की चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता की सराहना करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) की भूमिका को विस्तार से समझाया गया है।
नए बदलावों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और विवाद
इन नए अध्यायों को शामिल किए जाने पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया है कि एनसीईआरटी अब मासूम छात्रों के मन में पक्षपातपूर्ण बातें भरने और इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने के लिए एक राजनीतिक विभाग की तरह काम कर रही है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने भी चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को पाठ्यक्रम में शामिल करने की निंदा की और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में इसके कारण लाखों मतदाता अपने अधिकारों से वंचित हुए थे। इसके विपरीत, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आपातकाल से जुड़े अध्याय का स्वागत करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को उस दौर के काले कारनामों के बारे में पता होना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों।
पिछले वर्षों के चर्चित बदलाव और अन्य विवाद
हाल के दिनों में कक्षा 6 की कन्नड़ भाषा की पाठ्यपुस्तक 'कृष्णा' के नाम और उसमें शाकाहार को बढ़ावा देने के आरोपों पर विवाद हुआ था, जिस पर परिषद ने स्पष्ट किया कि पुस्तक का नाम नदी पर है और अध्याय में दोनों तरह के आहार शामिल हैं। इसी तरह, कक्षा 9 की कला शिक्षा की पुस्तक में मोहनजोदड़ो की 'डांसिंग गर्ल' की प्रतिमा के चित्र को डिजिटल रूप से ढके जाने पर इतिहासकारों के विरोध के बाद एनसीईआरटी ने मूल तस्वीर को बहाल करने का निर्णय लिया। इसके पूर्व, कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों के जिक्र पर देश के मुख्य न्यायाधीश ने भी आपत्ति जताई थी। पिछले तीन वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो अगस्त 2025 में भारत विभाजन के विशेष मॉड्यूल्स में जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन को जिम्मेदार ठहराने पर विवाद हुआ था। जुलाई 2025 में मुगल काल के शासकों को असहिष्णु और क्रूर दर्शाने वाले बदलाव किए गए थे, जबकि 2024 में राजनीति विज्ञान की किताबों से बाबरी मस्जिद, गुजरात दंगे और अल्पसंख्यकों जैसे संवेदनशील विषयों को हटाया गया था। इससे पहले अप्रैल 2023 में कक्षा 12 की इतिहास की किताबों से मुगल साम्राज्य, अकबरनामा और राजनीति विज्ञान से शीत युद्ध व अमेरिकी वर्चस्व जैसे अध्यायों को हटाया गया था, जिसे परिषद ने पाठ्यक्रम को हल्का करने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया था।
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