गुरु इस माह से मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे
ज्योतिष शास्त्र में गुरु इस माह से वक्री होकर मिथुन राशि में प्रवेश करने वाले हैं, जिससे कई राशियों की किस्मत में बड़े परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। यह गोचर 5 दिसंबर 2025 से पूरी तरह प्रभावी होगा, जब गुरु वक्री अवस्था में कर्क से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। यह काल विशेष रूप से उन जातकों के लिए महत्वपूर्ण होगा, जिनकी कुंडली में गुरु शुभ प्रभाव में हैं।
वर्तमान में गुरु कर्क राशि में भ्रमण कर रहे हैं, जो उनकी उच्च स्थिति मानी जाती है। लेकिन अब जब वे वक्री चाल में मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, तब उनका प्रभाव एक नए आयाम में परिवर्तित होगा। यह गोचर ज्ञान, बुद्धि, करियर, संपत्ति और पारिवारिक संबंधों पर सीधा असर डालेगा।
पंडितों के अनुसार, “गुरु का मिथुन में वक्री होना जीवन में पुराने अवसरों को पुनः सक्रिय करेगा। यह वह समय है जब कुछ अधूरे कार्य पूरे होंगे और रुके हुए धन के मार्ग खुलेंगे।” इससे इन राशियों को होगा लाभ
मिथुन राशि
गुरु का आपकी ही राशि में प्रवेश करना आपके लिए अत्यंत शुभ रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और सफलता दोनों मिलेंगी। व्यापार में लाभ की संभावना है और करियर में स्थिरता प्राप्त होगी। दांपत्य जीवन में सामंजस्य बढ़ेगा तथा प्रेम संबंधों में भी मधुरता आएगी। विद्यार्थियों के लिए भी यह समय उपलब्धियों से भरा रहेगा।
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए यह गोचर सकारात्मक परिणाम लाएगा। आपको नई संभावनाएं मिलेंगी और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। लंबे समय से रुका हुआ कार्य अब गति पकड़ेगा। संपत्ति से जुड़ी योजनाओं में लाभ होगा और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ बनेगी। यह समय आपकी मेहनत का प्रतिफल लेकर आने वाला है।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्यवृद्धि का रहेगा। गुरु का प्रभाव आपके रुके हुए कार्यों को पूर्ण करेगा और धन के नए स्रोत खोलेगा। धार्मिक कार्यों में रूचि बढ़ेगी, साथ ही विदेश यात्रा या नई दिशा में विस्तार की संभावना भी बनी रहेगी।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए गुरु का वक्री होना विशेष रूप से लाभदायक रहेगा। आपकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी और निवेश से लाभ मिलेगा। पारिवारिक संबंधों में सुधार आएगा और आप आत्मविश्वास से आगे बढ़ेंगे। करियर में स्थिरता और सामाजिक मान-सम्मान में वृद्धि होगी।
गुरु ग्रह को मजबूत करने के उपाय
• हर गुरुवार को पीले वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की पूजा करें।
• पीली दाल, हल्दी, या केसर का दान करें।
• “ॐ बृं बृहस्पते नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
• गुरुवार का व्रत रखें और भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें।
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