ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल, निवेशक सतर्क
वैश्विक ऊर्जा संकट: $120 के पार पहुँचा कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव से बिगड़े हालात
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई यह भारी तेजी मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध का परिणाम है। ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली आपूर्ति रुकने की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया है।
ट्रंप का कड़ा रुख और चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है जिसमें जलमार्ग को फिर से खोलने की बात कही गई थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक कोई ठोस परमाणु समझौता नहीं होता, प्रतिबंध जारी रहेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विवादित एआई-जनरेटेड तस्वीर के साथ ईरान को चेतावनी देते हुए "नो मोर मिस्टर नाइस गाय" का संदेश साझा किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का रूप ले सकती है।
बाजार के ताजा आंकड़े
तेल की कीमतों में लगातार नौवें दिन बढ़त देखी गई है:
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ब्रेंट क्रूड: 1.62% की वृद्धि के साथ 119.94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया।
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WTI क्रूड: 0.59% की तेजी के साथ 107.51 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।
इन बढ़ती कीमतों का सीधा प्रभाव मुंबई, दिल्ली और चेन्नई जैसे भारतीय महानगरों में परिवहन लागत और कॉरपोरेट मुनाफे पर पड़ने की आशंका है।
आपूर्ति की चुनौतियां और यूएई का बड़ा कदम
आपूर्ति के मोर्चे पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई से ओपेक (OPEC) गठबंधन से अलग होने का निर्णय लिया है। इस कदम से तेल उत्पादन और कीमतों पर नियंत्रण रखने की ओपेक की शक्ति कमजोर हो सकती है। वहीं, 28 फरवरी से जारी सैन्य संघर्ष के बाद से खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर प्रतिबंध लगे हुए हैं।
भारत पर प्रभाव और भविष्य का अनुमान
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे औद्योगिक केंद्रों में उत्पादन लागत बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका की नाकेबंदी जारी रही और होर्मुज़ जलमार्ग बंद रहा, तो आपूर्ति का संकट और गहराएगा। फिलहाल बाजार में स्थिरता की उम्मीद कम है और आने वाले दिनों में कीमतों में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
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