वन विभाग में फर्जी भुगतान का खुलासा
डोंगरगढ़। वन विभाग ने भ्रष्टाचार की एक नई इबारत लिखी है! करोड़ों की शासकीय राशि के गबन का ऐसा तरीका अपनाया गया कि सुनकर दिमाग चकरा जाए. ग्रामीणों के बैंक खातों में मजदूरी के पैसे डाले गए और फिर लालच देकर उनसे वापस भी ले लिए गए. मजेदार बात यह है कि जिन लोगों के नाम पर भुगतान हुआ, उनमें एक गर्भवती महिला और एक नाबालिक स्कूली छात्र भी शामिल है!|पूरा मामला वर्ष 2021 का है, जब डोंगरगढ़ वन परिक्षेत्र के बोरतलाव और खैरागढ़ जिले के कटेमा गांव में बांस-भिर्रा कटाई, मिट्टी चढ़ाई और फेंसिंग जैसे कार्यों के लिए शासन ने करोड़ों रुपए की राशि स्वीकृत की थी. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है|शिकायतकर्ता विलास जांभुलकर के अनुसार, इन कार्यों के नाम पर ग्रामीणों के खातों में करोड़ों रुपए जमा किए गए, लेकिन असल में कोई काम हुआ ही नहीं. फिर क्या? वन विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों को झांसा देकर बैंक से पैसे निकलवाए और वापस ले लिए. बदले में उन्हें महज 1000 रुपये का झुनझुना थमा दिया गया!
गर्भवती महिला के नाम पर फर्जी भुगतान
भ्रष्टाचार की हद तो तब पार हो गई जब इस खेल में गर्भवती महिला और स्कूली छात्र तक को घसीट लिया गया. बछेराभाठा की एक महिला, जो उस वक्त गर्भवती थी, के नाम पर मजदूरी का भुगतान दिखाया गया. अब सवाल यह उठता है कि जो महिला उस समय गर्भवती थी, वह भला मजदूरी कैसे कर सकती थी?
स्कूली छात्र को कागज में बना दिया मजदूर
पीड़िता ने बताया कि उसने कभी वन विभाग में काम नहीं किया, फिर भी उसके खाते में पैसे डाले गए और बाद में उससे वापस ले लिए गए. इसी तरह, ग्राम भंडारपुर के एक स्कूली छात्र हेमंत कुमार के नाम पर भी फर्जी भुगतान हुआ. स्कूल के प्रिंसिपल ने पुष्टि की कि वह छात्र रोजाना कक्षा में उपस्थित रहता था, लेकिन सरकारी कागजों में वह ‘वन विभाग में मजदूरी’ कर रहा था!
कार्रवाई के लिए सालों से खा रहे ठोकर
शिकायतकर्ता इस घोटाले के कागजों को लेकर पिछले तीन साल से दर-दर भटक रहे हैं. वन विभाग के खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात! प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंची, वहां से दस्तावेज भी मिले, मगर जांच फिर उन्हीं अफसरों को सौंप दी गई जो खुद इस भ्रष्टाचार के गुनहगार हैं. ऐसे में कार्रवाई की उम्मीद कैसे की जाए? मामला जितना बड़ा, उतनी ही गहरी इसकी जड़ें!
बड़ी मछलियों के शामिल होने की आशंका
करोड़ों के इस घोटाले में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि बड़े अधिकारियों और नेताओं के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है. यही वजह है कि भ्रष्टाचार साबित होने के बावजूद किसी पर कार्रवाई नहीं हो रही. डोंगरगढ़ वन विभाग का यह घोटाला भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है. सवाल यह है कि आखिर कब तक ऐसे घोटाले होते रहेंगे और कब तक शासन-प्रशासन आंखें मूंदे रहेगा?
जांच के नाम पर अधिकारी ने साधी चुप्पी
बहरहाल, जिम्मेदारों ने इस घोटाले की जांच करने फिर से एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है, जिसमें डोंगरगढ़ तहसीलदार उप वनमंडलाधिकारी पूर्णिमा राजपूत और मनरेगा अधिकारी को शामिल किया गया है लेकिन इस जांच कमेटी को बने भी अब तीन माह बीत चुके हैं अधिकारी अभी भी जांच का हवाला देकर चुप्पी साधे बैठे हैं.
एशिया के बेस्ट वर्कप्लेस 2026: भारत का दबदबा कायम, टॉप-100 में 34 भारतीय कंपनियां
जावा सागर में लापता हुआ जहाज, 240 लोग सवार; खोज और बचाव अभियान जारी
यूपीआआई के बावजूद क्रेडिट कार्ड क्यों हैं खास? जानें उनके नए फायदे!
तेल आपूर्ति पर मंडराया बड़ा संकट, होर्मुज के बाद बाब अल-मंडेब में हूतियों का दबदबा
सागर शराब कांड में पुलिस की कार्रवाई, 30 हजार के इनामी आरोपी को मुठभेड़ में पकड़ा
परिवारवाद के मुद्दे पर मायावती ने दी सफाई, भाई आनंद कुमार को लेकर कही बड़ी बात
भारत मंडपम के बाहर जुटे तिब्बती यूथ कांग्रेस के सदस्य, पुलिस ने 50 से अधिक को हिरासत में लिया
एमपी में स्वाइन फ्लू का कहर, भोपाल में एच1एन1 मरीज ने दम तोड़ा
सिद्धार्थ बाबू की कहानी: निजी नौकरी छोड़ी, UPSC में चमके और बन गए विदेश सेवा अधिकारी
राजनीति से सुरों तक, मलयेशियाई पीएम ने हिंदी गीत गाकर दिल्ली में बांधा समां
डारियो अमोडेई ने उठाया एआई सुरक्षा का मुद्दा, विकास की रफ्तार कम करने की मांग
आज एमपी के 18 जिलों में तेज बारिश के आसार, IMD ने जारी किया मौसम अलर्ट
आरजेडी की उम्मीदवार सूची से नाराज कांग्रेस, बिहार में फिर सामने आई गठबंधन की खटास
ममता बनर्जी के लिए बागी टीएमसी गुट ने खोले दरवाजे, नंदीग्राम में उम्मीदवार नहीं उतारने का ऐलान
ब्रिक्स मंच पर दिखी गर्मजोशी, पीएम मोदी ने सिर्फ एक नेता को लगाया गले