पंजाब से लेकर असम तक इस तरह से मनाते हैं मां सरस्वती का प्राकट्य दिवस बसंत पंचमी, होते हैं ये महाआयोजन
बसंत पंचमी भारतीय परंपरा का ऐसा पर्व है, जो धर्म, प्रकृति, संस्कृति और शिक्षा चारों को एक सूत्र में पिरोता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था. इस दिन माता सरस्वती की पूजा अर्चना करने से राहु के अशुभ प्रभाव में कमी आती है. आइए जानते हैं देशभर में बसंत पंचमी का पर्व कैसे मनाया जाता है...
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है और इस पर्व को लेकर तैयारियां भी शुरू हो चुकी है. इस बार बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. यह पर्व ऋतु परिवर्तन, ज्ञान, विद्या, संगीत और सृजनात्मकता का प्रतीक माना जाता है. इस दिन प्रकृति, मानव जीवन और समाज तीनों में नई ऊर्जा का संचार होता है. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था. बसंत पंचमी का त्योहार देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाएगा. बसंत पंचमी को विद्या की देवी मां सरस्वती और फाल्गुन के महीने के आगमन के तौर पर मनाया जाता है, लेकिन देश के अलग-अलग राज्यों में बसंत पंचमी को मनाने का तरीका भी अलग है.
पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम में भव्य तरीके से बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती का पूजन किया जाता है. घर से लेकर शिक्षण संस्थानों और सामुदायिक पंडालों में मां की प्रतिमाओं को स्थापित कर पूजन होता है और रात भर भक्ति गीत गाए जाते हैं. बंगाल में बसंत पंचमी के दिन हाते खोड़ी भी होता है. इस दिन माता-पिता बच्चों को पहला अक्षर लिखना सिखाते हैं. माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन हाते खोड़ी करने से बच्चे पर मां सरस्वती की विशेष कृपा होती है.
पंजाब और हरियाणा में बसंत पंचमी को पीली सरसों के लहलहाते खेतों से जोड़कर देखा जाता है. बसंत पंचमी सरसों की फसल के पकने का संकेत देता है. इस दिन पंजाब और हरियाणा में पीले वस्त्र पहनकर पारंपरिक भोजन का स्वाद लिया जाता है. इसके साथ ही पतंग भी उड़ाई जाती है.
उत्तर प्रदेश के वाराणसी और प्रयागराज के घाटों पर विशेष गंगा आरती का आयोजन होता है और स्नान का भी विशेष महत्व माना गया है. बसंत पंचमी के दिन प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में स्नान करना फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि पवित्र नदी में स्नान से सारे पापों का नाश होता है और घर में समृद्धि का वास होता है.
राजस्थान और गुजरात में बसंत पंचमी के दिन पतंगबाजी के बड़े आयोजन किए जाते हैं. इस दिन लोग पीले कपड़ों से लेकर पीले फूलों की माला भी धारण करते हैं. राजस्थान और गुजरात में बसंत पंचमी को नए ऊर्जावान मौसम के रूप में देखा जाता है.
वहीं, तेलंगाना के बासर में मां सरस्वती का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है, जहां बसंत पंचमी के दिन अक्षर अभ्यासम का आयोजन होता है. इसमें बच्चों को शिक्षित करने के प्रयास से लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है और विद्या से जुड़ी चीजों का दान भी किया जाता है.
बता दें कि बसंत पंचमी को ज्ञान, बुद्धि, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था. देशभर में शैक्षणिक संस्थानों, विद्यालयों और घरों में विशेष पूजा-अर्चना कर विद्यार्थियों की विद्या और सफलता की कामना की जाती है. कई स्थानों पर बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान दिलाने की परंपरा भी निभाई जाती है, जिसे विद्यारंभ कहा जाता है.
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