मुर्दाघर के फ्रीजर से नहीं निकल पाई दादी, डॉक्टरों की एक गलती की वजह से हुई मौत
वाशिंगटन। अस्पताल में मुर्दाघर के फ्रीज में एक महिला को गलती से बंद कर दिया गया। महिला की जब आंख खुली, तब बाहर निकलने की काफी कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हुई। जमा देने वाली ठंड की वजह से उसकी अंदर ही मौत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, मारिया डी जीसस अरोयो नाम की महिला को लॉस एंजिल्स के उनके घर में हार्ट अटैक आया। इसके बाद महिला को मृत घोषित किया गया। इस दादी को मृत घोषित करने के बाद मुर्दाघर के फ्रीजर में रखा गया। कुछ देर बाद महिला को होश आया और दादी ने फ्रीजर से निकलने की कोशिश की, लेकिन ठंड से वजह से उनकी मौत हो गई।
अब महिला के परिवार ने दावा किया कि उन्हें जीवित रहते हुए ही मुर्दाघर के फ्रीजर में रखा गया था। डॉक्टरों ने उनके शरीर को निर्जीव समझ बॉडी बैग में बंद कर फ्रीजर में रख दिया। लेकिन वह तब भी जीवित थीं। कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, मारिया का शव अस्पताल के एक रेफ्रिजरेटेड शवगृह में रखा गया था। हालांकि, जब कई दिनों बाद अंतिम संस्कार गृह के कर्मचारी बैग लेने पहुंचे, तब उन्होंने पाया कि बैग आधा खुला था और महिला अंदर औंधे मुंह पड़ी थी। महिला की टूटी हुई थी और चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त था।
अस्पताल के खिलाफ परिवार की कानूनी कार्रवाई में दावा किया गया है कि 80 साल की महिला को जिंदा रहते ही मुर्दाघर के फ्रीजर में डाला गया था और बाद में जमा देने वाले तापमान के कारण मौत हुई। इस भयावह गलती का पता तब तक नहीं चला जब तक कि अंतिम संस्कार करने वाले लोग उनकी बॉडी को लेने नहीं पहुंचे। परिवार द्वारा नियुक्त एक रोगविज्ञानी ने बाद में निर्धारित किया कि जब उन्हें फ्रीजर में रखा गया था, तब वह होश में थीं और उन्हें चोटें तब लगी थीं, जब वह ठंडे तापमान में जागने के बाद बॉडी बैग से बाहर निकलने का प्रयास कर रही थीं। कानूनी दस्तावेजों में, पैथोलॉजिस्ट ने कहा कि महिला को जिंदा जमा दिया गया था। जब महिला जगीं और वहां से निकलने की कोशिश की, तब उनका चेहरा क्षतिग्रस्त हो गया और उसने अपना चेहरा नीचे की ओर कर लिया, क्योंकि वह अपनी जमी हुई कब्र से बाहर निकलने का असफल प्रयास कर रही थीं।
उसके परिवार ने सबसे पहले जनवरी 2011 में लापरवाही का दावा दायर किया था। 2012 में रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, उन्होंने गलत तरीके से हुई मौत और चिकित्सा कदाचार का एक अतिरिक्त मुकदमा दायर किया। निचली अदालत ने क़ानून की सीमाओं के आधार पर मामले को खारिज किया था। अब कैलिफोर्निया के द्वितीय जिला अपील न्यायालय में केस को फिर से खुला है। अदालत ने कहा कि वादी के पास यह संदेह करने की कोई वजह नहीं थी कि मृतक को अस्पताल के मुर्दाघर में रखे जाने के समय वह जीवित थीं, मृत नहीं। परिवार गलत तरीके से जिंदा होने का दावा पहले नहीं कर सकता था।
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