गंभीर अपराध मानते हुए अदालत ने सख्त रुख अपनाया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के सबसे चर्चित 'विराट सराफ अपहरण कांड' में हाई कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने दोषियों द्वारा सजा कम करने या बरी करने के लिए दायर की गई अपील को सिरे से खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा को यथावत रखा है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डबल बेंच ने इस संवेदनशील मामले की अंतिम सुनवाई की।
'मासूमों का अपहरण समाज के लिए बड़ा खतरा'
केस की संवेदनशीलता और गंभीरता पर सख्त टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि केवल पैसों के लालच में मासूम बच्चों को बंधक बनाना एक अक्षम्य और बर्बर अपराध है। ऐसी घटनाएं न सिर्फ पीड़ित परिवार को जिंदगी भर का गहरा मानसिक आघात देती हैं, बल्कि पूरे समाज में असुरक्षा और खौफ का माहौल पैदा करती हैं। कोर्ट ने पुलिस प्रशासन द्वारा पेश किए गए कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट रिपोर्ट), सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और वॉयस सैंपल (आवाज के नमूने) को अपराधियों के खिलाफ सबसे अकाट्य और मजबूत सबूत माना।
क्या था साल 2019 का यह सनसनीखेज मामला?
यह पूरा वाकया साल 2019 का है, जब बिलासपुर के कोतवाली थाना अंतर्गत आने वाले एक स्थानीय कपड़ा व्यापारी विवेक सराफ के बेटे विराट सराफ को कुछ अज्ञात बदमाशों ने उसके घर के ठीक सामने से अगवा कर लिया था। वारदात के अगले ही दिन अपहरणकर्ताओं ने पीड़ित पिता को फोन कर बच्चे को छोड़ने के बदले 6 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फिरौती मांगी थी। विवेक सराफ ने बिना डरे इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी। पुलिस की विशेष टीमों ने लगातार 6 दिनों तक रात-दिन सर्च ऑपरेशन चलाया और सातवें दिन जरहाभाठा इलाके से मासूम विराट को सकुशल बरामद कर सभी आरोपियों को दबोच लिया।
कर्ज में डूबी सगी ताई ही निकली मुख्य मास्टरमाइंड
पुलिस ने जब इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहराई से तफ्तीश की, तो एक बेहद चौंकाने वाला पारिवारिक सच सामने आया। मासूम विराट के अपहरण की पूरी साजिश किसी और ने नहीं, बल्कि उसकी सगी बड़ी मां (ताई) नीता सराफ ने रची थी। जांच के मुताबिक, नीता पर बाजार का भारी कर्ज था, जिसे चुकाने के लिए उसने अपने ही भतीजे को शिकार बनाने की योजना बनाई।
खुलासे में यह भी पता चला कि आरोपी पहले परिवार के ही एक अन्य रिश्तेदार के बच्चे को अगवा करने वाले थे, लेकिन वह बच्चा शहर से बाहर चला गया, जिसके बाद उन्होंने विराट को निशाना बनाया। इस घिनौनी साजिश में ताई नीता सराफ के साथ सतीश शर्मा, राजकिशोर सिंह, हरेकृष्ण कुमार और एक अन्य सहयोगी पूरी तरह शामिल थे, जिन्हें अब जिंदगी भर जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा।
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