महंगे रत्न जेब पर पड़ रहे भारी? कम बजट में चमकेगी किस्मत! जानिए कौन सा उपरत्न करेगा आपकी समास्या का समाधान
रत्नों का ज्योतिष से रिश्ता सदियों पुराना माना जाता है. कई लोग ग्रहों की शांति और जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए पुखराज, नीलम या हीरा जैसे रत्न पहनते हैं, लेकिन सच यह भी है कि इनकी कीमत हर किसी के बजट में फिट नहीं बैठती. ऐसे में ज्योतिष शास्त्र में उपरत्न यानी सब्स्टीट्यूट स्टोन का विकल्प काफी लोकप्रिय हो रहा है. दिलचस्प बात यह है कि आजकल युवा भी महंगे रत्नों की जगह कम कीमत वाले उपरत्नों को चुन रहे हैं. वजह साफ है कम खर्च में वही ज्योतिषीय ऊर्जा पाने की उम्मीद. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि उपरत्नों का असर मुख्य रत्नों की तुलना में थोड़ा धीमा या हल्का हो सकता है, लेकिन सही सलाह और सही धारण विधि के साथ ये काफी प्रभावी साबित होते हैं.
ज्योतिष में क्यों बढ़ रहा है उपरत्नों का चलन बीते कुछ वर्षों में रत्नों की कीमतों में तेज बढ़ोत्तरी हुई है. असली पुखराज, माणिक या नीलम लाखों रुपये तक पहुंच जाते हैं. ऐसे में आम लोग विकल्प तलाशते हैं. यही कारण है कि उपरत्न बाजार तेजी से बढ़ रहा है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार उपरत्न ग्रहों की समान ऊर्जा को कम तीव्रता में सक्रिय करते हैं.
कौन से रत्न के लिए कौन सा उपरत्न पुखराज का विकल्प पुखराज को गुरु ग्रह से जोड़कर देखा जाता है. इसकी जगह सुनहला यानी सिट्रीन और टोपाज पहनने की सलाह दी जाती है. यह शिक्षा, विवाह और आर्थिक स्थिरता से जुड़े मामलों में उपयोगी माना जाता है.
नीलम का विकल्प नीलम काफी महंगा और तेज असर वाला रत्न माना जाता है. इसके विकल्प के रूप में आयोलाइट और अमेथिस्ट धारण किए जाते हैं. ज्योतिष में इसे शनि ग्रह से जोड़ा जाता है.
मोती के विकल्प इसके बदले मूनस्टोन (Moonstone) या व्हाइट ओपल धारण किया जा सकता है.
पन्ना के विकल्प पन्ना के बदले पेरिडॉट या ओनिक्स धारण किया जा सकता है. ये करियर, संवाद क्षमता और आत्मविश्वास से जुड़े मामलों में उपयोगी माने जाते हैं.
माणिक के विकल्प माणिक की जगह गार्नेट और लाल स्फटिक पहनने की सलाह दी जाती है.
क्या उपरत्न सच में असर करते हैं? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में रहता है. ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि उपरत्न काम तो करते हैं, लेकिन उनका प्रभाव मुख्य रत्नों जितना तेज नहीं होता. कई बार असर दिखने में अधिक समय लग सकता है.
धारण करने से पहले ये गलती न करें रत्न हो या उपरत्न, बिना सलाह पहनना सही नहीं माना जाता. गलत रत्न कई बार मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान या स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ा सकता है. इसलिए योग्य ज्योतिषी से कुंडली विश्लेषण करवाना जरूरी माना जाता है.
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