डॉक्टरों ने कहा- समय पर टीकाकरण से गंभीर बीमारियों का खतरा घटता है
सर्वाइकल कैंसर रोधी टीकाकरण में छत्तीसगढ़ पिछड़ा; 2 महीनों में सिर्फ 4% लक्ष्य पूरा, अफवाहों के डर से सहमे अभिभावक
रायपुर। महिलाओं में जानलेवा साबित हो रहे सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए मुफ्त एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। राष्ट्रीय रैंकिंग में राज्य खिसककर 26वें पायदान पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य महकमे की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अभियान शुरू होने के बाद से अब तक निर्धारित लक्ष्य का महज 4 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा किया जा सका है।
2.62 लाख के लक्ष्य के सामने केवल 12 हजार को लगा टीका
प्रदेश में 14 से 15 साल की लगभग 2.62 लाख किशोरियों को इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित करने के लिए एचपीवी वैक्सीन लगाने का खाका खींचा गया था। हालांकि, अभियान के दो महीने बीत जाने के बाद भी केवल 12,300 लड़कियों को ही यह सुरक्षा कवच मिल पाया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर टीकों को लेकर फैल रही मनगढ़ंत अफवाहें इस जरूरी अभियान की राह में सबसे बड़ा रोड़ा साबित हो रही हैं।
बांझपन और शारीरिक कमजोरी की अफवाहों ने बढ़ाई चिंता
ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरों के कई तबकों में इस बात का झूठा भ्रम फैला हुआ है कि एचपीवी टीका लगवाने से किशोरियों में बांझपन, कमजोरी या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसी बेबुनियाद खौफ के कारण माता-पिता अपनी बेटियों को लेकर टीकाकरण केंद्रों पर नहीं आ रहे हैं। इस बीच, डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञों ने साफ किया है कि यह वैक्सीन पूरी तरह क्लीनिकली सर्टिफाइड और सुरक्षित है, और इसका कोई भी घातक विपरीत असर नहीं है।
16 मार्च से अस्पतालों में चल रहा है अभियान
छत्तीसगढ़ में इस निशुल्क टीकाकरण अभियान का आगाज 16 मार्च 2026 को हुआ था। इस योजना के तहत तय आयु वर्ग की किशोरियों को उनकी जन्मतिथि वाले पहचान पत्र के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में मुफ्त टीके लगाए जा रहे हैं। सुरक्षा के लिहाज से टीका लगाने के बाद किशोरियों को आधे घंटे के लिए डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाता है और पहचान के तौर पर उनकी उंगली पर स्याही का निशान भी लगाया जा रहा है।
पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश ने रचा इतिहास, पश्चिम बंगाल फिसड्डी
इस राष्ट्रीय अभियान में छत्तीसगढ़ का पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश 7.51 लाख किशोरियों के लक्ष्य के मुकाबले 100 फीसदी से ज्यादा का रिकॉर्ड बनाकर देश में नंबर वन पर काबिज है। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल की स्थिति सबसे खराब है, जहां अब तक इस अभियान के तहत शून्य टीकाकरण दर्ज हुआ है।
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