चुनावी हार के बावजूद इस्तीफा नहीं, ममता बनर्जी के फैसले पर सियासी बहस तेज
मुंबई: ममता बनर्जी के इस्तीफे न देने के फैसले को संजय राउत का समर्थन, कहा—यह सत्ता का मोह नहीं बल्कि लोकतंत्र बचाने का संघर्ष है
पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों के बाद उपजे राजनीतिक गतिरोध के बीच शिवसेना-यूबीटी के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने ममता बनर्जी के अडिग रुख का पुरजोर बचाव किया है। मुंबई में पत्रकारों से चर्चा के दौरान राउत ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री द्वारा पद न छोड़ने का निर्णय केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर एक बड़ा सवालिया निशान है। उन्होंने इस कदम को महज कुर्सी से चिपके रहने की कवायद मानने से इनकार करते हुए इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए लड़ी जा रही एक अनिवार्य लड़ाई करार दिया है। राउत के अनुसार, जिस तरह से बंगाल के परिणाम सामने आए हैं, उसने विपक्षी दलों के भीतर व्यवस्था के प्रति एक गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है।
निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल और विपक्ष की भावी रणनीति
संजय राउत ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार करते हुए उसे वर्तमान सत्ता का अनुचर बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्था का व्यवहार पूरी तरह से पक्षपाती हो चुका है और वह केंद्र के इशारों पर कार्य कर रही है। राउत ने विपक्षी खेमे को आगाह किया कि यदि इसी तरह की तानाशाही और भेदभावपूर्ण रवैया जारी रहा, तो भविष्य में निष्पक्ष चुनाव की कल्पना करना भी कठिन होगा। उन्होंने सभी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय विपक्षी दलों से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर एकजुट हों और यह गंभीरता से विचार करें कि क्या मौजूदा व्यवस्था के भीतर चुनाव लड़ना अब सार्थक रह गया है।
बंगाल चुनाव परिणामों को ममता बनर्जी ने बताया सुनियोजित षड्यंत्र
तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टी की हार को जनादेश मानने से साफ इनकार कर दिया है। उनका दृढ़ मत है कि उनकी पराजय जनता के कारण नहीं बल्कि एक गहरी और सुनियोजित साजिश का नतीजा है, जिसमें संस्थागत मशीनरी का दुरुपयोग किया गया। राज्य की 294 सीटों में से भाजपा को मिली बढ़त और टीएमसी की सीटों में आई कमी को उन्होंने अस्वाभाविक बताते हुए इसे सीधे तौर पर निर्वाचन आयोग की कार्यशैली से जोड़ा है। ममता बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की है कि वह अपने पद पर बनी रहेंगी क्योंकि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल विशेष से न होकर उस व्यवस्था से है जो पारदर्शिता की धज्जियां उड़ा रही है।
महाराष्ट्र के राजनीतिक इतिहास से सीख और इंडिया गठबंधन की एकजुटता
संजय राउत ने ममता बनर्जी को साहस न हारने की सलाह देते हुए महाराष्ट्र के साल 2022 के राजनीतिक संकट की याद दिलाई है। उन्होंने बताया कि किस तरह उद्धव ठाकरे के इस्तीफे ने कानूनी लड़ाई को कमजोर किया था और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के अनुसार यदि वे पद पर रहते तो स्थितियां भिन्न हो सकती थीं। इसी अनुभव को साझा करते हुए उद्धव ठाकरे ने स्वयं ममता बनर्जी से फोन पर वार्ता कर उन्हें अटूट समर्थन का आश्वासन दिया है। इंडिया गठबंधन के तमाम प्रमुख घटक दल इस समय ममता बनर्जी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले सकता है।
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