शव भेजने पर विवाद, बरगी डैम हादसे में प्रशासन पर उठे सवाल
बरगी डैम हादसा: खराब मौसम ने रोकी रेस्क्यू की राह, विरोध के बाद एयरलिफ्ट होंगे शव और परिजन
जबलपुर। बरगी डैम हादसे के तीसरे दिन भी लापता लोगों की तलाश जारी है, लेकिन शनिवार सुबह से ही मौसम बचाव कार्य में बाधा बना हुआ है। दूसरी ओर, मृतकों के शवों को तमिलनाडु भेजने को लेकर हुए विवाद के बाद अब प्रशासन ने परिजनों को हवाई जहाज से भेजने का आश्वासन दिया है।
खराब मौसम और रेस्क्यू की चुनौतियां
हादसे के बाद से लापता चार लोगों की तलाश के लिए शनिवार सुबह 7 बजे से सेना, NDRF और SDRF ने संयुक्त अभियान शुरू किया।
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तेज हवाएं: डैम में चल रही तूफानी हवाओं और ऊंची लहरों के कारण बचाव दल की नावों को चलाने में काफी जोखिम हो रहा है।
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रुकावट: सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस और रेस्क्यू टीमों को बीच-बीच में सर्चिंग रोकनी पड़ रही है। अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अनुभवी गोताखोरों की मदद ली जा रही है।
प्रशासनिक अड़चन और कर्मचारियों का आक्रोश
हादसे में जान गंवाने वाली महिलाओं के शवों को उनके गृह ग्राम त्रिची (तमिलनाडु) भेजने को लेकर शुक्रवार रात काफी तनावपूर्ण स्थिति रही।
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विवाद की जड़: प्रशासन ने शर्त रखी थी कि शव के साथ केवल एक परिजन ही जा सकता है, बाकी को खुद टिकट करानी होगी। मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद आई इस शर्त ने परिजनों और आयुध निर्माणी खमरिया (OFK) के कर्मचारियों को आक्रोशित कर दिया।
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आंदोलन की चेतावनी: कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि पूरे परिवार को विमान से नहीं भेजा गया, तो वे फैक्ट्री के गेट पर शव रखकर प्रदर्शन करेंगे।
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समाधान: दबाव बढ़ता देख एसडीएम रांझी ने हस्तक्षेप किया और अब परिजनों को भी फ्लाइट से तमिलनाडु भेजने की व्यवस्था की जा रही है। शनिवार दोपहर को शवों को कोयंबटूर के मार्ग से त्रिची रवाना किया जाएगा।
एक परिवार की खुशियां मातम में बदलीं
यह हादसा आयुध निर्माणी खमरिया में कार्यरत कामराज आर्य के परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। 15 सदस्यों का यह परिवार डैम घूमने आया था।
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बरामद शव: कामराज की पत्नी काकुलाझी (38 वर्ष) और सौभाग्यम अलागन (42 वर्ष) के शव मिल चुके हैं।
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अभी भी लापता: खुद कामराज (45 वर्ष), उनका 5 वर्षीय बेटा श्रीतमिलवेंदन, मयूरन (9 वर्ष) और एक अन्य सदस्य अभी भी लापता हैं।
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चमत्कारी बचाव: कामराज का 10 वर्षीय बेटा लहरों के बीच संघर्ष करते हुए किनारे आ गया था, जिसे जल निगम के कर्मियों ने बचा लिया।
समय के साथ बढ़ रही चुनौती
गर्मी और पानी के कारण शव तेजी से खराब (डी-कम्पोज) हो रहे हैं, जिसके चलते परिजनों की जल्द से जल्द रवानगी अनिवार्य हो गई है। कामराज के सहकर्मियों का कहना है कि पीड़ित परिवार इस आर्थिक और मानसिक स्थिति में नहीं है कि वे खुद टिकट का बोझ उठा सकें, इसलिए सरकारी मदद ही एकमात्र सहारा है।
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