सिलिंडर ब्लैक मार्केट: भोपाल में हो रही मनमानी
एजेंसियों पर उठे सवाल, 2500-3000 में ब्लैक में बिक रहा गैस
भोपाल। राजधानी भोपाल में कमर्शियल गैस सिलिंडर को लेकर बड़ा खेल सामने आ रहा है। बाजार में कमी का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि सिलिंडर खुलेआम ब्लैक में 2500 से 3000 रुपए तक में बेचे जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जहां एजेंसियां सीमित सप्लाई की बात कर रही हैं, वहीं शहर की ज्यादातर दुकानों पर सिलिंडर उपलब्ध हैं, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं। छोटे दुकानदारों का आरोप है कि एजेंसी से जुड़ी डिलीवरी गाडिय़ां ही चोरी-छुपे ज्यादा दामों पर सिलिंडर सप्लाई कर रही हैं। आधिकारिक तौर पर सप्लाई बंद बताई जा रही है, लेकिन ग्राउंड पर सिलिंडर की उपलब्धता ब्लैक नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है। होटल संचालकों ने बताया कि उन्हें 2500 से 3500 रुपए में सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि महंगाई पहले ही बढ़ी हुई है, ऊपर से महंगे सिलिंडर की वजह से खाने-पीने की चीजों के दाम 10 रुपए तक बढ़ाने पड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी से जुड़ी गाडिय़ां ही चोरी-छुपे सप्लाई कर रही हैं और ज्यादा रेट वसूल रही हैं।
एक सिलिंडर मिला, वरना दुकान बंद
दुकानदार अर्जुन ने बताया कि उन्हें मुश्किल से एक सिलिंडर ब्लैक में मिला है, जिससे फिलहाल दुकान चल रही है। उन्होंने कहा कि अगर अगले कुछ दिनों में सिलिंडर नहीं मिला तो दुकान बंद करनी पड़ सकती है। साथ ही उन्होंने भी आरोप लगाया कि एजेंसी की सप्लाई लाइन से ही ब्लैक का खेल चल रहा है।
चाय दुकानदार ने 2500 में खरीदा सिलिंडर
चाय दुकान संचालक गौरव ने बताया कि उन्हें एचपी कंपनी का कमर्शियल सिलिंडर 2500 रुपए में ब्लैक में लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि एजेंसी से सिलिंडर नहीं मिल रहा, लेकिन बाहर महंगे दामों पर आसानी से उपलब्ध है। गौरव का कहना है कि एजेंसी से जुड़े लोग ही ज्यादा कमाई के लिए सिलिंडर ब्लैक में बेच रहे हैं।
3300 रुपए में जुगाड़ से मिला सिलिंडर
होटल संचालक दयाशंकर साहू ने बताया कि उन्हें 3300 रुपए में सिलिंडर खरीदना पड़ा। उन्होंने कहा कि करीब 7 किलोमीटर दूर जाकर सिलिंडर लाना पड़ा और वह भी डिलीवरी करने वाले के जरिए। दयाशंकर ने बताया कि हाल ही में होटल शुरू किया था, लेकिन हालात ऐसे हैं कि बंद करने की नौबत आ गई है।
एजेंसी का दावा-हम नहीं कर रहे सप्लाई
इंडियन गैस एजेंसी के मैनेजर दीपक सक्सेना ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई केवल इमरजेंसी सेवाओं जैसे अस्पताल और हॉस्टल तक सीमित है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ब्लैक में सिलिंडर बेच रहा है तो उस पर कार्रवाई करना खाद्य विभाग का काम है।
खाद्यविभाग का बयान,शिकायत पर होगी कार्रवाई
खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे लगातार कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में शिकायत मिलने के बाद ही कार्रवाई संभव होती है। सिस्टम पर बड़े सवालएक तरफ एजेंसियां सप्लाई सीमित बता रही हैं, दूसरी तरफ बाजार में महंगे दामों पर सिलिंडर आसानी से मिल रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह गैस कहां से आ रही है और किसके संरक्षण में ब्लैक का यह खेल चल रहा है।
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