जामसागर छोटा तालाब को राजनीतिक अदूरदर्शिता के कारण एशिया का सबसे बड़ा मुत्रालय बना और वर्तमान परिषद ने तो विधिवत् रूप से मुत्रालय बनाने का कार्य किया
रामपुरा
ऐतिहासिक धरोहरों से श्रृंगारती रामपुरा नगर अपना एक गौरवशाली इतिहास है गांधी सागर निर्माण के पूर्व होलकर स्टेट की राजधानी रहा रामपुरा कि प्राचीनतम जल दोहन व्यवस्था आज के वैज्ञानिकों के लिए भी तकनीकी शिक्षा का केंद्र बिंदु है ऐसा प्रामाणिकता के साथ इसलिए कहा जा सकता है कि रामपुरा नगर के मध्य जाम सागर जिसे छोटा तालाब भी कहा जाता है इस तालाब में जल भराव क्षमता का नाला अरावली पर्वत से आता था इस नाले पर चार विभिन्न विभिन्न कुंड स्थापित किए गए थे जो बाहाव के दौरान मिट्टी और पत्थर रोकने का कार्य करते थे और तालाब में गाद भरने से रोके जाने का कार्य करते थे नगर के मध्य स्थित इस तालाब का निर्माण पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद श्री दिग्गी राजा के पूर्वज राघोगढ़ की रानी जामवंती देवी द्वारा करवाया गया था इस तालाब की चारों ओर धार्मिक स्थान है उत्तर में जगदीश मंदिर एवं बलदेव मंदिर है और दक्षिण में जगनाथ मंदिर है और पूर्व में मनकामेश्वर महादेव मंदिर है और पश्चिम में विश्व प्रसिद्ध बाबा मुला खान साहब कि दरगाह है जिसका इतिहास बोहरा समाज के धर्म गुरु से जुड़ा हुआ है इस तालाब के चारों और आकर्षक कला कृति कि छतरियां बनी हुई थी और बीच में आज भी एक भव्य छतरी बनी हुई है लेकिन दुर्भाग्य जनक तथ्य यह है कि राजनीतिक दूरदर्शिता एवं अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए इस आकर्षक को रमणीय तालाब को सुनियोजित षड्यंत्र के तहत एशिया का सबसे बड़ा मुत्रालय तब्दील करने में यहां के राजनीतिक लोग सफल हुए और वर्तमान परिषद ने तो इस तालाब में विधिवत रूप से मुत्रालय बनाने के लिए नगर पंचायत की बैठक भी बुला ली गई थी जो निरस्त हुई जिन वयोवृद्ध लोगों ने इस तालाब में पानी भरा हुआ देखा और नहाने का आनंद उठाया उन वयोवृद्ध लोगों ने बताया जगदीश मंदिर के दर्शन और जगनाथ मंदिर के दर्शन करने के लिए तैर कर किया करते थे जब उनसे यह पूछा गया कि यह तलाब कितना गहरा है और इस तालाब में पानी भरना क्यों बंद किया गया तो उन्होंने बहुत ही रहस्यमय जानकारी उजागर की वयोवृद्ध लोगों ने बताया कि तालाब में पानी भरने के कारण इसकी पानी की झरने बाबा मुला खान साहब की विश्व प्रसिद्ध दरगाह और पास स्थित कब्रस्तान में फुटती थी इस कारण राजनीतिज्ञों ने आर्थिक लाभ लेकर तालाब में पानी आने वाले नालों को गांधी सागर के पानी में मिलाने का कार्य किया जिससे इसकी जल भराव क्षमता समाप्त हुई फिर पूर्व मंत्री श्री नरेंद्र नाहटा ने यहां बस स्टैंड स्थापित करने के लिए तालाब कि पाल थोड़ी और पानी भर जाने के पश्चात पानी निकालने का नाला तोड़ा गया इस प्रकार वर्तमान परिषद ने तलाब में मुत्रालय बनाने का प्रयास कर रही निष्पक्ष आवाज से तारिका राठौर कि रिपोर्ट मो ...8085637012🖊️🖊️🖊️🖊️
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