शिवालिक के बाद नंदा देवी की सुरक्षित वापसी, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति क्या है?
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान की ओर से भारतीय ध्वज वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग देने के फैसले के बाद भारतीय एलपीजी टैंकर शिवालिक ने इस अहम समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। वहीं दूसरा एलपीजी पोत नंदा देवी भी इस संवेदनशील तेल मार्ग से सुरक्षित बाहर निकल गया है।
शिवालिक को लेकर क्या है स्थिति?
सरकारी सूत्रों ने शनिवार को बताया कि शिवालिक इस समय भारतीय नौसेना की निगरानी और सुरक्षा में आगे बढ़ रहा है। जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और अगले दो दिनों में भारत के किसी बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है। इसके मुंबई या कांडला बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या कूटनीतिक संवाद से भारत को मिली राहत?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच वस्तुओं और ऊर्जा आपूर्ति के सुचारु प्रवाह को लेकर उच्चस्तरीय चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि इसी कूटनीतिक संवाद के बाद भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग का रास्ता साफ हुआ।इससे पहले शुक्रवार को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने संकेत दिया था कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय जहाजों को जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ता मिल सकता है। उन्होंने कहा था कि भारत ईरान का मित्र देश है और दोनों देशों के इस क्षेत्र में साझा हित हैं। फथाली ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में भारत सरकार ने युद्ध के बाद विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद की है।राजदूत का यह बयान ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची के उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस निर्यात का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।
होर्मुज में फंसे भारत के कितने जहाज?
उधर, पोर्ट्स एंड शिपिंग मंत्रालय ने गुरुवार को कहा था कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में संचालित भारतीय ध्वज वाले जहाजों की संख्या 28 बनी हुई है और सभी भारतीय जहाजों व चालक दल की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। इनमें से 24 भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद थे, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार थे। वहीं चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में थे, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद थे।
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