पुनर्वास योजना में नाकामी: बड़वानी के लोग पानी की किल्लत में परेशान
बड़वानी: सरदार सरोवर परियोजना से विस्थापित परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन कर रहे हैं. अंजड़ तहसील से सटे छोटा बड़दा गांव में 100 से अधिक घर मौजूद है. लेकिन इस बस्ती में पेयजल जैसी मूलभूत सम्याओं से लोग जूझ रहे हैं. स्थानीय ग्रामीण दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं.
मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे ग्रामीण
प्रदेश स्तर पर पुनर्वास स्थलों में भूखंडों की रजिस्ट्री के लिए शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, आवेदन भी स्वीकार किए जा रहे हैं. मगर स्थानीय निवासियों आरोप है कि कागजी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जबकि जमीनी जरूरतें अधूरी हैं. मूल गांव से विस्थापित कर यहां बसाने के बाद अब उन्हें मूलभूत संसाधनों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
4 किमी दूर से पानी लाने को मजबूर ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीण सुमन बाई ने बताया, "यहां करीब दो–तीन महीनों से पानी की गंभीर समस्या है. परिवार का एक सदस्य मजदूरी के लिए बाहर जाता है, हमें पड़ोसियों से पानी मांगकर काम चलाना पड़ रहा है." वहीं, एक अन्य बुजुर्ग मोतीलाल काका ने बताया, "पहले मोटर से पानी मिलता था, लेकिन गंदे पानी की शिकायत के बाद मोटर हटा दी गई. अब करीब 4 किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता है. टैंकर मंगवाने पर करीब 400 रु खर्च करने पड़ते हैं."
अधिकारियों पर लगे लापरवाही के आरोप
स्थानीय निवासी महेश ने बताया, "पहले कुएं से पानी मिलता था, लेकिन मोटर की केबल काट दिए जाने से आपूर्ति बंद हो गई. पानी की कमी के चलते उन्हें अपनी भैंस तक बेचनी पड़ी. रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो रहा है. कई बार संबंधित अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक ठोस समाधान सामने नहीं आया."
जल्द समस्याओं के समाधान का आश्वासन
इस मामले पर एनवीडीए के इंजीनियर लोकेश सोलंकी ने बताया, "क्षेत्र में एक ट्यूबवेल खुदवाया गया है. साथ ही बड़ी मोटर लगाकर जलप्रदाय व्यवस्था को मजबूत करने की प्रक्रिया जारी है. जल्द ही पानी की समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा."
पानी की कमी से जूझ रहे गोवंश
अंजड़ के समीप स्थित बोरलाय को कागजों में वृंदावन ग्राम घोषित किया गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग तस्वीर बयां कर रहे हैं. यहां संचालित श्री कृष्ण गौशाला में 114 गाय और अन्य गौवंश के लिए पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है. गौशाला परिसर में पशुओं के लिए हौज और एक बड़ा पानी का टैंक बना है, लेकिन बोरिंग की सुविधा नहीं होने से टैंक में नियमित पानी भर पाना संभव नहीं हो पा रहा है. गर्मी का मौसम शुरू होते ही जलस्रोत सूखने लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहराने की आशंका जताई जा रही है.
गौशाला अध्यक्ष दीपांशु पाटीदार ने बताया, "फिलहाल आसपास के किसानों की मदद से अस्थायी रूप से पानी की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. अगर जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो गौवंश को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है."
काशी में एमपी-यूपी समन्वय: सीएम मोहन यादव ने तीर्थ प्रबंधन प्रणाली का लिया जायजा
भवानीपुर में सियासी जंग: बंगाल चुनाव में बीजेपी का रणनीतिक कदम
CSK के लिए शुरुआती झटका, पहले मैच में दिखी टीम की कमजोरी
सरेंडर नक्सली चुनाव लड़ सकते हैं? पर्यटन मंत्री अग्रवाल का रुख साफ
होटल कमरा मिला खाली, इंजीनियर बेहोश, IPL टीम से थी कनेक्टेड
टीचिंग इलेक्टिव टेस्ट (TET) को लेकर शिक्षक संगठनों का गुस्सा बढ़ा
देहरादून में हत्याकांड और फायरिंग मामले में कार्रवाई, चार गिरफ्तार और बार पर लगाया ताला
सीएम नीतीश का प्रतिक्रिया: मघड़ा मंदिर हादसे में राहत एवं मुआवजे के निर्देश
कम सवारियों से जूझ रही जबलपुर-चांदाफोर्ट ट्रेन, रूट विस्तार की मांग तेज
कई रणजी और IPL अनुभव वाले खिलाड़ी भी नीलामी में शामिल
475 रन वाला मैच याद है? पंजाब और गुजरात के हेड-टू-हेड रिकॉर्ड
बच्चों के आधार कार्ड बनाने के लिए 500 से ज्यादा ऑपरेटर्स तैनात
इस्फ़हान में अमेरिकी एयर स्ट्राइक: 1,000 किलोग्राम बंकर बस्टर बम गिराया गया
मुस्लिम-दलित वोट को साधने का बड़ा दांव, बंगाल में राजनीतिक खेल बदल सकता है
हिडमा विवाद पर बढ़ी राजनीति, राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी का पलटवार
अरविंद केजरीवाल की नसीहत: सत्ता में बैठे लोगों के लिए चेतावनी या कटाक्ष?
युवाओं के लिए चेतावनी: चक्कर को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
खुलेआम हत्या से दहला शहर, पुलिस की मौजूदगी पर उठे सवाल
फर्जी SMS से हो रही ठगी, पुलिस ने जारी की जरूरी गाइडलाइन
राज्य में अब कुल 1752 ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं