‘नेताओं के द्वारा बनाए गए धर्मगुरु सत्ता के गुरु’, शंकराचार्य सदानंद सरस्वती का गौ माता पर बड़ा बयान
नर्मदापुरम: द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने नेताओं के द्वारा बनाए गए गुरुओं को सत्ता का गुरु बताया है. प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ हुए विवाद को लेकर उन्होंने कहा कि जो धर्मगुरु दो धड़ों में बट रहे हैं, वो धर्मगुरु हैं ही नहीं, वो सत्ता के गुरु हैं.
नर्मदापुरम के पिपरिया रेलवे स्टेशन पर शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने अपने अनुयायियों से मुलाकात की. शंकराचार्य सतना में आयोजित होने वाली धर्म सभा में शामिल होने जा रहे थे. इसी दौरान उन्होंने गौ रक्षा और सनातन धर्म को लेकर कई बातें कहीं.
'नेताओं के पक्ष में बोलते हैं सत्ता के धर्मगुरु'
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि "सत्ता के धर्मगुरु नेताओं के पक्ष में, सरकार के पक्ष में बोलेंगे. हम लोग जो बोलेंगे वह देश के पक्ष में, धर्म के पक्ष में और आप लोगों के बच्चों के कल्याण के पक्ष में बोलेंगे. सरकार अच्छा करेगी तो अच्छा कहेंगे, गलत करेगी तो उसे गलत कहेंगे. मोदी जी ने, योगी जी ने जो अच्छे काम किए हमने उनकी प्रशंसा की. जहां-जहां गलती की हम उसकी आलोचना करेंगे."
'चारों शंकराचार्य के बीच में होता है संवाद'
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि "चारों पीठ के शंकराचार्य में संवाद होता रहता है. गौ माता के उत्थान और रक्षा के लिए शंकराचार्य और सभी संत समाज एक है. हिंदू मात्र की यह भावना है कि गौ वध बंद होना चाहिए और गौ माता को राज्य या राष्ट्र माता घोषित किया जाना चाहिए. इस विषय में किसी को संदेह करने की आवश्यकता नहीं है."
'नहीं दी जा रही धर्म की शिक्षा'
शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि "मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में युवा पीढ़ी में संस्कारों के छरण रोकने की व्यवस्था ही नहीं है. भारत की शिक्षा पद्धति में धर्म की शिक्षा देने की कोई व्यवस्था नहीं है. संविधान में धर्म की शिक्षा देने का कोई इंतजाम नहीं है. खासकर सनातन धर्म की शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. जब बच्चों को धर्म की शिक्षा मिलेगी ही नहीं तो उनसे धर्म के पालन की अपेक्षा कैसे करेंगे."
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