संवेदनशील सुशासन की मिसाल: समारोह में नहीं आ सके सेवानिवृत्त कर्मी, तो प्रशासन स्वयं पहुंचा उनके द्वार
रायपुर : छत्तीसगढ़ में सुशासन की पहचान केवल योजनाओं और निर्णयों तक सीमित नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं के साथ आमजन और कर्मचारियों के जीवन को स्पर्श करने में भी दिखाई देती है। बस्तर जिला प्रशासन ने इसी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए एक ऐसा अनुकरणीय कदम उठाया, जिसने पूरे राज्य में प्रशासन की सकारात्मक छवि को और सशक्त किया है।
जगदलपुर स्थित कलेक्टोरेट के आस्था कक्ष में 16 सेवानिवृत्त अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए गरिमामय विदाई समारोह आयोजित किया गया था। इस अवसर पर वन विभाग के कर्मी दिलराज दास का नाम भी शामिल था, किंतु सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पूर्व उन्हें लकवा (पैरालिसिस) का गंभीर आघात लगा, जिससे वे चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। समारोह में उपस्थित होने की उनकी गहरी इच्छा स्वास्थ्यगत विवशता के कारण अधूरी रह गई।
जब यह विषय कलेक्टर आकाश छिकारा के संज्ञान में आया, तो उन्होंने मानवीय संवेदना के साथ त्वरित निर्णय लेते हुए कहा कि यदि कर्मचारी समारोह में नहीं आ सकता, तो प्रशासन स्वयं उसके घर जाएगा। कलेक्टर के निर्देश पर वरिष्ठ कोषालय अधिकारी अनिल कुमार पाठक ने सहायक कोषालय अधिकारी सुममता ध्रुव एवं कोषालय स्टाफ के साथ दिलराज दास के निवास पर पहुंचकर उन्हें पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) सहित सभी सेवांत लाभ सम्मानपूर्वक सौंपे तथा उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।
प्रशासन को अपने द्वार पर पाकर दिलराज दास और उनके परिजन भावुक हो उठे। यह पहल उनके लिए केवल आर्थिक संबल नहीं, बल्कि सम्मान, भरोसे और आत्मीयता का प्रतीक बनी। बस्तर जिला प्रशासन की यह संवेदनशील कार्यशैली यह सिद्ध करती है कि छत्तीसगढ़ का सुशासन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों पर आधारित जन-केन्द्रित प्रशासन है, जो अपने प्रत्येक कर्मचारी के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ खड़ा है।
बगावत बर्दाश्त नहीं’ – टिकट विवाद पर Mamata Banerjee सख्त
बिहार को बनाएंगे देश का नंबर-1 प्रदेश – Nishant Kumar की पहली प्रतिक्रिया
होर्मुज संकट से हड़कंप: Strait of Hormuz बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा
नक्सलवाद पर संसद में गरजे Amit Shah, कहा– ‘गोली का जवाब गोली से
मेधावी छात्रों को मिला बड़ा सम्मान, 135 विद्यार्थियों को मिला गौरव
MPL ऑक्शन का आगाज, इंदौर में पहली बार खिलाड़ियों पर दांव
मामूली रकम बनी जानलेवा, उधार मांगने पर किसान की हत्या
प्रकृति की रक्षा में लद्दाख का मॉडल, पर्यावरण संरक्षण में वैज्ञानिक पहल