इस मुद्दे पर बनी थी भारत की पहली कलर फिल्म, जानें कब हुई थी रिलीज?
भारत में सिनेमा का इतिहास काफी पुराना है। 1913 में भारत की पहली साइलेंट फिल्म रिलीज हुई। इसके बाद भारत में फिल्मों का सिलसिला शुरू हुआ। आज हम आपको भारत की पहली कलर फिल्म के बारे में बता रहे हैं। 1913 में भारत में फिल्मों का सिलसिला शुरू हुआ। फिल्म राजा हरिश्चंद्र के बाद कई फिल्में रिलीज हुईं, लेकिन वो फिल्में ब्लैक एंड व्हाइट होती थीं। आपको भारत की पहली साइलेंट फिल्म का नाम, भारत की पहली बोलती फिल्म का नाम, ये तो मालूम होगा, लेकिन क्या आप भारत की पहली कलर फिल्म के बारे में जानते हैं? क्या आप जानते हैं ये फिल्म कब रिलीज हुई थी? अगर नहीं, तो चलिए हम आपको बताते हैं। इस फिल्म का नाम है किसान कन्या।
1937 में रिलीज हुई थी फिल्म
किसान कन्या भारत की पहली कलर फिल्म थी। ये फिल्म साल 1937 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी। यह भारत की पहली स्वदेशी रूप से निर्मित रंगीन फिल्म थी। इससे पहले वी. शांताराम की फिल्म सैरंध्री में कुछ कलर सीन्स दिखाए गए थे, लेकिन उस फिल्म को जर्मनी में प्रिंट किया गया था। वहीं, किसान कन्पूया पूरी तरह से भारत में ही बनी थी।
सिनेकलप तकनीक से बनी थी किसान कन्या
रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसान कन्या सिनेकलर तकनीक से बनाई गई थी जिसके प्रोसेस राइट्स अर्देशिर ईरानी ने एक अमेरिकन कंपनी से लिए थे। किसान कन्या को मोती गिडवानी ने डायरेक्ट किया था। वहीं, इस फिल्म को अर्देशिर ईरानी ने प्रोड्यूस किया था।
किसान कन्या
अर्देशिर ईरानी की बात करें तो उन्हें भारत की पहली बोलती फिल्म बनाने के लिए भी जाना जाता है। अर्देशिर ईरानी ने 1931 में आई पहली बोलती फिल्म आलमआरा को प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया था।
फिल्म में नजर आए थे ये कलाकार
किसान कन्या की बात करें तो ये फिल्म सआदत हसन मंटो की एक नॉवल पर आधारित थी। फिल्म का स्क्रीनप्ले भी सआदत हसन मंटो ने ही लिखा था। इस फिल्म में पद्मा देवी, जिल्लू, गुलाम मोहम्मद, निसार, सैयद अहमद और गनी गनी नजर आए थे।कौन थी भारत की पहली महिला डायरेक्टर? मुस्लिम परिवार में हुआ था जन्म
7.2 है आईएमडीबी रेटिंग
इस फिल्म के म्यूजिक पर राम गोपाल पांडे ने काम किया था। फिल्म में करीब 10 गाने थे। इस फिल्म की कहानी की बात करें तो फिल्म में गरीब किसानों की दुर्दशा पर बात की गई है। आईएमडीबी के मुताबिक, इस फिल्म में किसानों का शोषण करने वाले जमींदार की हत्या हो जाती है। इस हत्या का आरोप एक ईमानदार किसान रामू पर लगता है। फिल्म की कहानी इसी के इर्दगिर्द घूमती है। ये फिल्म भारतीय सिनेमा के लिए एक मील का पत्थर साबित हुई थी। इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 7.2 है।
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