संवेदनशील ग्राम चिपुरभट्टी में नियद नेल्ला नार से पहली बार बना पक्का घर
रायपुर : अंधकार कितना भी गहरा हो, आशा की एक किरण उसे मिटा देती है। इसी कहावत को चरितार्थ किया है उसूर विकासखंड के नक्सल प्रभावित नियद नेल्लानार ग्राम चिपुरभट्टी की 74 वर्षीय रामबाई ने, जिनके जीवन में प्रधानमंत्री आवास योजना ने नई रोशनी भर दी है।
वर्षों से नक्सली दहशत झेल रहे इस गांव में सरकारी योजनाएँ लागू होना मुश्किल था। न तो विकास कार्य हो पाते थे और न ही कोई निर्माण। लेकिन नियद नेल्लानार कार्यक्रम की शुरुआत के साथ ही हालात बदले, और पहली बार गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बनने का रास्ता खुला।
रामबाई को मिला पहला पक्का आवास, जीवन में लौटी मुस्कान
बुजुर्ग रामबाई ने अपने दो पुत्रों को बीमारी के कारण खो दिया था। बहू और चार पोतों की जिम्मेदारी उन्हीं पर थी। टूटी-फूटी झोपड़ी में रहकर जीवन संघर्ष बन गया था। रामबाई बताती हैं कि उन्होंने सोचा नहीं था कि हमारे जीवन में भी कभी खुशी आएगी। माओवादी दहशत से गांव में कोई काम नहीं होता था। वित्तीय वर्ष 2024–25 में जब 1 लाख 20 हजार रुपए की राशि से पीएम आवास स्वीकृत हुआ, तो ऐसा लगा जैसे जीवन में नई उम्मीद मिल गई।
आज उनका पक्का घर बनकर तैयार हो चुका है और यह गांव का पहला स्वीकृत और पूर्ण हुआ आवास है। वे इसे बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा बता रही हैं।
लखमू पनिक को भी मिला आवास, बदले हालात
इसी क्रम में गांव के लखमू पनिक को भी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवास स्वीकृत हुआ है। पत्नी के निधन के बाद उन्होंने अकेले बेटे की परवरिश की और 2 एकड़ जमीन में खेती कर परिवार को संभाला। आज उनका बेटा विवाहित है और घर में पोते के कदमों की खुशियाँ हैं। लखमू बताया कि सरकार की मदद से अब हमारे पास भी पक्का घर होगा। यह सिर्फ मकान नहीं, बल्कि हमारे परिवार की सुरक्षा और सम्मान है।
नक्सल प्रभावित गांव में विकास की नई शुरुआत
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले इन दो आवासों ने न सिर्फ दो परिवारों का जीवन बदला है, बल्कि यह संदेश भी दिया है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की रोशनी लगातार फैल रही है। नियद नेल्लानार कार्यक्रम ने इस बदलाव को नई रफ्तार दी है।
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