‘मित्र मंडली’ की ओटीटी पर हुई वापसी, थिएटर में असफल रहने के बाद अब क्या करेगी कमाल?
मुंबई: 'मित्र मंडली'- वो तेलुगु फिल्म जो थिएटर में दर्शकों को हंसा नहीं पाई, अब ओटीटी पर एक नए रूप में वापसी कर चुकी है। प्रियदर्शी के नेतृत्व में बनी यह फिल्म अब 6 नवंबर से अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि मेकर्स ने इसे ओटीटी रिलीज से पहले पूरी तरह से री-एडिट किया है, ताकि दर्शकों को एक नई और मजेदार कहानी का अनुभव मिल सके।
थिएटर में फिल्म हो गई फ्लॉप
थिएटर रिलीज के वक्त 'मित्र मंडली' के लिए उम्मीदें आसमान पर थीं। फिल्म के निर्माता बन्नी वास ने इसे अपनी बैनर फिल्म के तौर पर बड़े जोश के साथ पेश किया था और दावा किया था कि यह 'जाती रत्नालु' जैसी ब्लॉकबस्टर साबित होगी। प्रचार और चर्चा इतनी थी कि दर्शकों में भी एक अलग उत्सुकता थी। लेकिन रिलीज के बाद फिल्म की किस्मत ने साथ नहीं दिया। दीपावली के आसपास रिलीज हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही और उस सीजन में आई अन्य फिल्मों की तुलना में आखिरी पायदान पर पहुंच गई।
ओटीटी के लिए बनाई गई नई रणनीति
अब जब थिएटर का शोर थम चुका है, मेकर्स ने दर्शकों को फिर से लुभाने की रणनीति बनाई है। कहा जा रहा है कि फिल्म को कई हिस्सों में काट-छांट कर दुबारा एडिट किया गया है। यानी वो सीन जो दर्शकों को लंबा या नीरस लग रहा था, अब शायद हट चुके हैं। सोशल मीडिया पर खुद फिल्म के लीड एक्टर प्रियदर्शी ने मजाकिया अंदाज में लिखा- 'अब जो आप देखने वाले हैं, वो एक ब्रांड न्यू वर्जन है, इस बार और भी शार्प, और भी मजेदार।'
फिल्म को एडिट करने के बाद किया गया रिलीज
तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में पिछले कुछ समय से यह ट्रेंड देखा जा रहा है कि थिएटर में असफल रहीं फिल्मों को ओटीटी पर दूसरा मौका दिया जा रहा है। कई बार रचनात्मक बदलाव, बेहतर एडिटिंग या नई मार्केटिंग रणनीति के साथ ये फिल्में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सफलता भी हासिल कर लेती हैं। 'मित्र मंडली' भी उसी राह पर कदम बढ़ा रही है।
कैसी है फिल्म की कहानी?
फिल्म की कहानी दोस्तों की मस्ती और उनके आपसी रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। हालांकि क्रिटिक्स ने पहले इसे कंफ्यूज्ड स्क्रीनप्ले और कमजोर हास्य कहकर नकारा था, लेकिन री-एडिटेड वर्जन में इन कमियों को सुधारने की कोशिश की गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रियदर्शी और बन्नी वास की यह जोड़ी ओटीटी पर दर्शकों को वही हंसी और मनोरंजन दे पाएगी, जिसकी उम्मीद उन्होंने थिएटर में की थी। दर्शक अब पहले से कहीं अधिक समझदार हैं- वो कंटेंट की गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं, न कि केवल प्रचार पर।
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