MP में स्नेक बाइट के केस तीन गुना बढ़े, लेकिन एंटी वेनम दवा नहीं, मरीजों का भगवान ही मालिक
भोपाल: मध्य प्रदेश में मानसून के आखिरी दौर में सांप काटने के मामलों में तेजी आई है। राज्य में एंटी-स्नेक वेनमकी उपलब्धता और वितरण में गंभीर कमियां सामने आई हैं। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में इसकी भारी कमी है। IHIP और IDSP के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच 3,334 सांप काटने के मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 12 लोगों की मौत हुई है। यह स्थिति राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों पर सवाल उठाती है।
तीन साल से लगातार बढ़ रहीं घटनाएं
पिछले तीन सालों में सांप काटने की घटनाएं चिंताजनक रूप से बढ़ी हैं। IHIP/IDSP डेटा बताता है कि 2022 में 1,208 मामले थे। यह संख्या 2024 में बढ़कर 3,334 हो गई है। यह लगभग तीन गुना वृद्धि है। हालांकि कुल मौतें कम रहीं, लेकिन 2023 और 2024 में हर साल 12 मौतें हुईं। यह दिखाता है कि बेहतर और तुरंत इलाज की कितनी जरूरत है।
1660 सेंटरों पर एक भी एएसवी नहीं
मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन के आंकड़ों से एंटी-स्नेक वेनम के वितरण में बड़ी असमानता दिखती है। राज्य के जिला ड्रग सेंटरों (DDCs) में एंटी-स्नेक वेनम की कमी है। कुल 1,727 सेंटरों में से 1,660 में एंटी-स्नेक वेनम का स्टॉक शून्य है। सिर्फ 67 सेंटरों पर कुल 617 यूनिट एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है। 20 या उससे ज्यादा यूनिट का उच्च स्टॉक केवल 6 जिलों के 8 सेंटरों पर ही है। उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों में एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता बहुत कम है।
कई जिलों में एक भी एंटी वेनम नहीं
संजीवनी क्लिनिकों में भी एंटी-स्नेक वेनम की कमी है। कुल 604 क्लिनिकों में से सिर्फ 71 के पास एंटी-स्नेक वेनम स्टॉक है। 533 क्लिनिकों में एंटी-स्नेक वेनम बिल्कुल नहीं है। भोपाल में 84 यूनिट, इंदौर में 54 और देवास में 41 यूनिट हैं। लेकिन इंदौर के 97, भोपाल के 63 और जबलपुर के 61 क्लिनिकों में स्टॉक शून्य है। सिविल सर्जन कार्यालयों में कुल 6,280 एंटी-स्नेक वेनम यूनिट हैं। इनमें से 19 कार्यालयों में 5,300 से ज्यादा यूनिट हैं। वहीं, 32 कार्यालयों में 1,000 से कम यूनिट हैं। दमोह, कटनी, मंडला और सतना जैसे कमजोर जिलों में या तो एक यूनिट है या बिल्कुल नहीं है।
सीएचसी और पीएचसी में भी यही हाल
52 जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHOs) के पास कुल 4,679 एंटी-स्नेक वेनम यूनिट हैं। 17 जिलों में 100 से ज्यादा यूनिट हैं। लेकिन 10 जिलों में 10 या उससे कम यूनिट हैं। अशोकनगर जिले में एंटी-स्नेक वेनम का कोई स्टॉक नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) में भी यही हाल है। 342 CHCs में से 20 में एंटी-स्नेक वेनम नहीं है। 1,227 PHCs में से 587 में स्टॉक शून्य है। केवल 334 PHCs में 10 से 99 यूनिट हैं। बड़वानी, धार और अलीराजपुर जैसे जिलों के 6 PHCs में ही 1,000 से ज्यादा यूनिट हैं।
सब हेल्थ सेंटरों की भी हालत गंभीर
ग्रामीण इलाकों में लोगों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण सब हेल्थ सेंटरों में एंटी-स्नेक वेनम की भारी कमी है। कुल 12,438 सेंटरों में से सिर्फ 17 के पास एंटी-स्नेक वेनम है, जिनकी कुल संख्या 57 यूनिट है। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHCs) की स्थिति थोड़ी बेहतर है। 223 UPHCs में से 66 के पास कुल 213 यूनिट एंटी-स्नेक वेनम है।
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