"मंत्रियों को हटाने वाले विधेयक पर ओवैसी का हमला, राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री संबंधों पर उठाए सवाल"
Owaisi Attack On Central Government: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को हटाने संबंधी हाल ही में पेश किए गए विधेयकों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या राष्ट्रपति वास्तव में प्रधानमंत्री से इस्तीफा ले सकते हैं। हैदराबाद के सांसद ने कहा कि संविधान में कहा गया है कि राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता से निर्देशित होंगे। उन्होंने तर्क दिया कि प्रस्तावित विधेयक राष्ट्रपति को प्रधानमंत्री को हटाने का अधिकार देता है, जो मौजूदा कानून के विपरीत है।
क्या राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को हटा सकते है?
ओवैसी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमने संविधान में कहा है कि भारत के राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह और सहायता से निर्देशित होंगे। यह अनुच्छेद संविधान में है। यह प्रस्तावित विधेयक कह रहा है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को हटा सकते हैं। यह क्या है? यह स्पष्ट रूप से उस अनुच्छेद के विपरीत है। उन्होंने आगे पूछा, क्या कोई राष्ट्रपति वास्तव में प्रधानमंत्री को इस्तीफा दिला सकता है?
केंद्र सरकार पर लगाए ये गंभीर आरोप
संयुक्त संसदीय समिति को भेजे गए इस विधेयक में उन प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों को हटाने का प्रावधान है जो गंभीर अपराधों के आरोपों का सामना कर रहे हैं और लगातार 30 दिनों से जेल में हैं। उन्होंने राज्य सरकारों की शक्तियों पर भी चिंता जताई और कहा कि अगर केंद्र सरकार चार या पांच राज्य मंत्रियों को गिरफ्तार करने का फैसला करती है, तो राज्य सरकार स्वतः ही गिर जाएगी।
निर्वाचित सरकार के लिए मौत की घंटी होगा यह विधेयक
हैदराबाद के सांसद ने कहा कि आजादी कहां है? आप ही उन्हें नियंत्रित करेंगे… बस चार या पांच मंत्रियों को गिरफ्तार कर लीजिए और सरकार चली जाएगी। पिछले हफ्ते संसद में विधेयक पेश करते हुए ओवैसी ने कहा कि सरकार पुलिस राज्य बनाने पर तुली हुई है और यह विधेयक निर्वाचित सरकार के लिए मौत की घंटी होगा। ओवैसी ने आगे कहा कि यह विधेयक शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं और लोगों के सरकार चुनने के अधिकार को कमजोर करते हैं।
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