मोदी सरकार की आक्रामक रणनीति: ‘नया भारत सीमा नहीं, सीधा जवाब देता है
नई दिल्ली। बीते 11 सालों में मोदी सरकार के कार्यकाल में रक्षा क्षेत्र में भारत का नजरिया काफी बदल चुका है और भारत अब आक्रमक रणनीति अपना रहा हैं। इस बदलाव के पीछे स्पष्ट सोच, मजबूत प्रतिरोध और आत्मनिर्भरता से मिली ताकत है। मोदी सरकार ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा।
इस परिवर्तन ने आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से निपटने में ज्यादा आत्मविश्वास के साथ आधुनिक और सक्रिय नजरिया अपनाने का मौका दिया है। इसी कड़ी में भारत ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के लिए लक्षमण रेखा खींच दी हैं। अगर अब दुश्मन ने कभी भी उन सीमाओं को लांघने की कोशिश करता हैं, तब दुश्मन को तबाही से कोई नहीं बचा सकेगा। पीएम मोदी ने दो टूक कहा हैं कि अब पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की एक भी घटना का निर्णायक जवाब दिया जाएगा। पीएम मोदी ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ निलंबित हुआ है। मतलब जब भी जरूरत पड़ेगी, यह हमले फिर से शुरू हो सकते हैं। भारत अब पहलगाम जैसी किसी भी आतंकी घटना का ऑपरेशन सिंदूर से भी बढ़कर निर्णायक जवाब देगा।
पाकिस्तान में सरकार किसी की सरकार रहे, जब भी भारत के साथ विवाद हुआ है परमाणु हमले की धमकी देना पाकिस्तानी नेताओं की आदत रही है। लेकिन, अब भारत तय कर चुका है कि न्यूक्लियर ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेगा। पाकिस्तान की परमाणु हमले की धमकियां आतंकवादी ठिकानों को तबाह करने से नहीं रोक सकेंगी। ऑपरेशन सिंदूर के साथ ही भारत परमाणु हमले वाली चिंता से बाहर निकल चुका है।
भारत अब आतंकवादियों और उन्हें पालने पोसने वाले में कोई फर्क नहीं करता। मतलब, किसी भी आतंकवादी घटना के लिए जितने जिम्मेदार आतंकी संगठन की होगी, उतना ही पाकिस्तान की भी होगी। मतलब, ऑपरेशन सिंदूर में सिर्फ आतंकी ठिकानों को ही निशाना बनाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन अब भारत उन्हें सक्रिय समर्थन देने वालों से भी भेद नहीं करेगा। पाकिस्तानी सेना के लिए इससे बड़ी चेतावनी नहीं हो सकती।
भारत के लिए अब यह भी न्यू नॉर्मल है कि अगर कभी भी पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत होती है, तब यह पहले सिर्फ आतंकवाद और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के मु्द्दे पर ही होगी। मतलब, पाकिस्तान के लिए दरवाजे भारत की ओर से बंद हो चुक हैं। अगर वह कभी भी भविष्य में रिश्ते सुधारना चाहता है, तब आतंकवाद पर लगाम कसनी ही पड़ेगी और उसके लिए भारत के सामने कश्मीर का मुद्दा उठाना नामुमकिन होगा।
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