पीएम मोदी ने लाल किले की प्राचीर से किया ऐलान- सिंधु पर एक बिंदु भी पीछे नहीं हटेगा भारत
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से ऐलान किया है कि भारत किसी भी कीमत पर एक बिंदु भी पीछे हटने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंधु जल समझौता ‘अन्यायपूर्ण और एकतरफा’ है जो भारत को मंजूर नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को अन्यायपूर्ण और एकतरफा’ करार देते हुए कहा कि सिंधु नदी के जल पर भारत और उसके किसानों का एकमात्र अधिकार है। मोदी ने कहा कि इस संधि ने भारत में कृषि को भारी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने इस समझौते को जारी रखने की निरर्थकता को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि इस संधि की वजह से सिंधु के जल से ‘हमारे दुश्मनों के खेतों की सिंचाई होती है, जबकि मेरे देश की धरती और मेरे देश के किसान प्यासे रहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले से पाकिस्तान को साफ संदेश दे दिया है कि भारत किसी भी कीमत पर आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और हर हरकत का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। सिंधु जल समझौते को लेकर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का स्टैंड साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि भारत किसी भी कीमत पर एक बिंदु भी पीछे हटने वाला नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंधु जल समझौता ‘अन्यायपूर्ण और एकतरफा’ है जो भारत को मंजूर नहीं हैं। मोदी ने कहा, भारत का जो पानी है, उसका इस्तेमाल भारत के लिए होगा, सिर्फ भारत के किसानों के लिए होगा और हम अब ऐसी व्यवस्था बर्दाश्त नहीं करेंगे जो अपने किसानों को वंचित रखे। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत भारत के किसानों को दशकों तक अकल्पनीय नुकसान’ उठाना पड़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा, भारत दशकों से इसे सहन करता आ रहा है। हम इसे और सहन नहीं करेंगे। हमारे किसानों के हित में, राष्ट्र के हित में, यह समझौता हमें मंजूर नहीं है।
पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया था। दरअसल भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में एक समझौता हुआ था। विश्व बैंक की मध्यस्थता में दोनों देशों ने समझौते पर साइन किए थे। इसके तहत सिंधु नदी प्रणाली की कुल 6 नदियों में से तीन का पानी पाकिस्तान के लिए और बाकी तीन का भारत के उपयोग के लिए निर्धारित किया गया था। वहीं पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुछ प्रोजेक्ट्स पर ऐतराज जताते हुए मध्यस्थता न्यायालय का रुख किया। इस कोर्ट ने भारत को सिंधु जल संधि का पालन करने का आदेश दिया। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह जनता के हित को नजरअंदाज नहीं कर सकता और किसी भी तीसरे पक्ष के दबाव में कभी नहीं आएगा। भारत के इस रुख से पाकिस्तान एक बार फिर बौखलाया हुआ है। आने वाले संकट के बारे में सोचकर ही पाकिस्तान के शीर्ष नेता भारत के खिलाफ जहर उगलने लगे हैं।
पाकिस्तान स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के उस फैसले पर इतरा रहा है जिसमें सिंधु जल संधि को बहाल करने को कहा गया था। हालांकि भारत ने इस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया था। भारत ने कह दिया था कि वह तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय की क्षमता और औचित्य को कभी स्वीकार ही नहीं करता है। ऐसे में भारत उसके किसी भी फैसले को मानने के लिए बाध्य नहीं है। मध्यस्थता न्यायालय ने कहा था कि भारत को पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान में बहने देना चाहिए।
भारत ने कह दिया था कि यह मामला मध्यस्थता न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता ही नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने हमेशा ही संधि के प्रावधानों का पालन किया था लेकिन पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देता है और आतंकियों का पनहगाह बना बैठा है।
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