₹ 500 नोट बनाम अफवाहें: मंत्री ने कहा—बंद नहीं, जारी भी है और वैध भी है
व्यापार : क्या देश में 500 रुपये के नोटों की आपूर्ति बंद होने वाली है? वित्त राज्य मंत्री ने ऐसी आशंकाओं से जुड़े एक सवाल का लिखित जवाब राज्यसभा में दिया है। वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को संसद में बताया कि 500 रुपये के नोटों की आपूर्ति बंद करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने साफ किया कि एटीएम से 100 या 200 रुपये के साथ 500 रुपये के नोट भी निकलते रहेंगे।
केद्रीय मंत्री के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सरकार को बताया है कि बार-बार उपयोग किए जाने वाले मूल्यवर्ग के बैंक नोटों तक जनता की पहुंच बढ़ाने के लिए, 28 अप्रैल, 2025 को 'एटीएम के जरिए 100 रुपये और 200 रुपये मूल्यवर्ग के बैंक नोटों का वितरण' शीर्षक से एक परिपत्र जारी किया गया है। इसके तहत सभी बैंकों और व्हाइट लेबल एटीएम ऑपरेटरों (डब्ल्यूएलएओ) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि उनके एटीएम नियमित आधार पर 100 रुपये और 200 रुपये मूल्यवर्ग के बैंक नोट वितरित करें।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि आरबीआई की ओर से निर्धारित लक्ष्य के अनुसार, 30 सितंबर 2025 तक सभी एटीएम में से 75 प्रतिशत एटीएम में कम से कम एक कैसेट से 100 या 200 रुपये मूल्यवर्ग के बैंक नोट निकल सकते हैं। उन्होंने कहा कि 31 मार्च 2026 तक 90 प्रतिशत एटीएम कम से कम एक कैसेट से 100 या 200 रुपये मूल्यवर्ग के नोट निकाले जा सकेंगे।
एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए चौधरी ने कहा कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने अप्रैल 2020 से मार्च 2025 तक या पिछले पांच वित्तीय वर्षों की अवधि के दौरान 76 मामलों को अपने हाथ में लिया है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान सेबी को धन वापसी (जुर्माने) के रूप में 949.43 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
डिस्गॉर्जमेंट से तात्पर्य किसी व्यक्ति या संस्था को प्रतिभूति बाजार में अवैध या अनैतिक प्रथाओं के माध्यम से प्राप्त किसी भी गलत तरीके से अर्जित लाभ को नियामक को लौटाने के लिए मजबूर करने से है। उन्होंने कहा, "भारतीय कानूनों के अनुसार धोखाधड़ी और छल-कपट दंडनीय अपराध हैं। कई केंद्रीय सरकारी, प्रवर्तन और नियामक एजेंसियां निवेश संबंधी धोखाधड़ी को रोकने, उसका पता लगाने और उसके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कार्रवाई कर रही हैं।"
उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने नौ मामलों की पहचान की है, जो मुख्य रूप से मल्टी-लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) घोटालों से संबंधित हैं। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी, 2020 से 30 जुलाई, 2025 तक की अवधि के दौरान, प्रवर्तन निदेशालय ने निवेश संबंधी धोखाधड़ी से संबंधित धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत धन शोधन के अपराध की जांच के लिए लगभग 220 मामले अपने हाथ में लिए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत में क्रिप्टो परिसंपत्तियों को विनियमित नहीं गया है। वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि आरबीआई-एसएसीएचईटी पोर्टल को अपंजीकृत/असंगठित संस्थाओं से अनधिकृत जमा गतिविधियों से संबंधित शिकायतें प्राप्त होती हैं।
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