हाउसिंग बोर्ड-आरडीए को खरीदारों का इंतज़ार, सालों से संपत्तियां पड़ी बेकार प्लानिंग में चूक या महंगे दाम? सरकारी भवन नहीं खोज पा रहे ग्राहक
आरडीए के 300 करोड़ के मकान-बाजार पड़े खाली, टेंडर पर टेंडर बेअसर
रायपुर: छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड और रायपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के करोड़ों रुपए के प्रोजेक्ट वर्षों से खरीदारों की बाट जोह रहे हैं। प्रदेश भर में हाउसिंग बोर्ड की करीब 4834 संपत्तियां और आरडीए की लगभग 300 मकान, दुकानें और फ्लैट ऐसे हैं, जो बिक नहीं पा रहे हैं। बार-बार टेंडर निकालने और छूट की पेशकश के बावजूद इन संपत्तियों में आम नागरिकों की रुचि नहीं बढ़ी है।
ऑफर के बावजूद खरीदार नदारद
हाउसिंग बोर्ड ने अपनी आवासीय व वाणिज्यिक संपत्तियों पर 30% तक की छूट दी है। आरडीए ने भी आवासीय भवनों पर 30% और व्यवसायिक संपत्तियों पर 50% भाड़ाक्रय सरचार्ज में राहत दी है। लेकिन इन रियायतों के बावजूद बिक्री में अपेक्षित उछाल नहीं आया है।
बिक्री में गिरावट, हालात चिंताजनक
हाउसिंग बोर्ड की संपत्तियों की सर्वाधिक बिक्री वर्ष 2016-17 में दर्ज की गई थी, जब 4,392 संपत्तियां बिकी थीं। इसके बाद से बिक्री का आंकड़ा लगातार घटता गया। वर्ष 2024-25 में अब तक केवल 1,376 संपत्तियां ही बिक पाई हैं।
महंगे दाम और लोकेशन बनी बाधा
इन संपत्तियों की कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं। खासकर दुकानें बहुत महंगी हैं, वहीं अधिकतर आवासीय प्रोजेक्ट शहर से दूर आउटर इलाकों में स्थित हैं, जिससे लोगों की रुचि कम हो रही है। इसके अलावा समय पर देखरेख और मेंटेनेंस की कमी से भी संपत्तियों की हालत खराब हो रही है।
सरकार के 5300 करोड़ रुपए फंसे
हाउसिंग बोर्ड के लगभग 5 अरब और आरडीए के करीब 300 करोड़ की संपत्तियां बिक नहीं पाई हैं। अगर समय रहते इनका निराकरण नहीं हुआ तो ये प्रोजेक्ट साल दर साल खराब होते जाएंगे और सरकारी नुकसान बढ़ेगा।
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