सुख-समृद्धि के लिए करें रविवार का व्रत, गुप्त नवरात्रि का चौथा और जगन्नाथ रथयात्रा का तीसरा दिन भी
रविवार का दिन ग्रहों के राजा भगवान भास्कर को समर्पित माना जाता है. अग्नि पुराण में सूर्य देव को साक्षात ब्रह्म माना गया है, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाले हैं. साथ ही सूर्य देव को इस चराचर जगत का पालन करने वाला भी माना जाता है. इस दिन विशेष विधि से पूजा से मनोवांछित लाभ प्राप्त होता है. मान्यता है कि रविवार के दिन व्रत रहने से और सूर्यदेव को अर्घ्य देने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और सम्मान व धन में वृद्धि होगी. आइए जानते हैं रविवार के दिन कौन कौन से पर्व मनाए जाएंगे और इस दिन का महत्व…
गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन
रविवार के दिन गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन है और इस दिन दस महाविद्याओं की चौथी देवी मां भुवनेश्वरी देवी की पूजा अर्चना की जाएगी. गुप्त नवरात्रि का समापन 4 जुलाई को भड़रिया नवमी के दिन होगा. साथ ही रविवार को भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का तीसरा दिन है. भगवान जगन्नाथ रथयात्रा 12 दिनों तक चलती है, जिसकी शुरुआत 27 जून को हुई और समापन 8 जुलाई को नीलाद्रि विजय के साथ होगा. इस दिन भगनान फिर से अपने मूल मंदिर लौट आएंगे और गर्भग्रह में स्थापित हो जाएंगे.
29 जून को आषाढ़ मास की पंचमी तिथि
दृक पंचागानुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सुबह 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगी, फिर उसके बाद पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी. उदिया तिथि को मानते हुए 29 जून को पंचमी तिथि मनाई जाएगी. इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से शुरू होगा और 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा. वहीं राहुकाल का समय 5 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 7 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. साथ ही रवि योग सुबह 5 बजकर 27 मिनटे से अगले दिन सुबह 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगा.
29 जून को कई शुभ योग
29 जून का दिन ग्रह-नक्षत्र के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दरअसल इस दिन चंद्रमा कर्क से सूर्य देव की राशि सिंह में प्रवेश करेंगे. साथ ही मिथुन राशि में सूर्य देव और गुरु ग्रह मौजूद रहेंगे, गुरु आदित्य योग बनेगा. वहीं रविवार को शुक्र ग्रह वृषभ राशि में गोचर करने वाले हैं, जिससे मालव्य राजयोग का निर्माण होगा. गुरु आदित्य और मालव्य राजयोग के अलावा रवि योग और सिद्धि योग भी बना रहेगा.
कुंडली में सूर्य होते हैं मजबूत
अग्नि और स्कंद पुराणों के अनुसार, रविवार के दिन व्रत रखने से सुख, समृद्धि, आरोग्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत को किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से शुरू करना शुभ माना जाता है. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी है, जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है. कुंडली में अगर सूर्य की स्थिति मजबूत होती है तो जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं होती और हमेशा तरक्की मिलती है. रविवार को आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन भी है और इस दिन मां भुवनेश्वरी देवी की पूजा की जाएगी.
रविवार व्रत पूजा विधि
व्रत शुरू करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान व ध्यान से निवृत्त होकर, मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें और चारों तरफ गंगाजल छिड़काव कर शुद्ध करें. फिर एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर पूजन सामग्री रखें, फिर सूर्य देव की पूजा करें, फिर रविवार व्रत की कथा सुनें और पूजा करें. इसके बाद सूर्य देव को तांबे के बर्तन में जल भरकर उसमें लाल फूल, अक्षत और रोली डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देने से विशेष लाभ मिलता है. इसके अलावा रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने, सूर्य देव के मंत्र “ऊं सूर्याय नमः” या “ऊं घृणि सूर्याय नमः” का जप करने से भी विशेष लाभ मिलता है.
रविवार व्रत पूजा उपाय
रविवार के दिन गुड़ और तांबे के दान का भी विशेष महत्व है. इन उपायों को करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है. साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता मिलती है. एक समय भोजन करें, जिसमें नमक का सेवन न करें. गरीबों को दान करें. रविवार के दिन काले या नीले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए. इस दिन मांस-मदिरा का सेवन, झूठ बोलना, किसी का अपमान करना, बाल या दाढ़ी कटवाना, तेल मालिश करना और तांबे के बर्तन बेचना भी वर्जित माना गया है. व्रत का उद्यापन 12 व्रतों के बाद किया जाता है.
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