अब नहीं चलेगी 'हुक्का पार्टी'! होटल में पुलिस ने मारा छापा, 2 युवतियां और 5 युवक पकड़े गए
बिलासपुर जिले के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित एक होटल में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर शराब और हुक्का पार्टी का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान होटल के कमरे से दो युवतियों सहित पांच युवक मिले, जो कमरे में मादक पदार्थों का सेवन कर रहे थे। पुलिस ने तत्काल मौके पर कोटपा एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए सभी पांचों को आरोपियों को हिरासत में लेकर होटल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है।
मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार देर रात सिरगिट्टी पुलिस को मुखबिर के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि होटल पेट्रेशियन के प्रथम तल पर कुछ बाहरी संदिग्ध आकर ठहरे हुए हैं। इस पर पुलिस की टीम तत्काल होटल पहुंची और होटल प्रबंधन से संपर्क किया। इस बीच आगंतुक रजिस्टर की जांच की गई। इस दौरान सभी कमरों की विधिवत तलाशी ली गई, जो सामान्य पाए गए। लेकिन कमरा नंबर 2008, जो तुषार अग्रवाल के नाम पर बुक किया गया था, वहां जांच के दौरान पांच युवक और दो युवतियां मिलीं।
आरोपी गिरफ्तार
कमरे के अंदर शराब पीने और हुक्का सेवन की गतिविधियां स्पष्ट रूप से पाई गईं। पुलिस ने मौके पर ही कोटपा अधिनियम के तहत विधि सम्मत कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों के विरुद्ध प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की। साथ ही, होटल प्रबंधन को लापरवाही और आगंतुकों की जानकारी छिपाने के आरोप में नोटिस जारी किया गया है। सीएसपी निमितेष सिंह ने बताया कि इस मामले में जांच जारी है।
DGP सिद्ध नाथ को मिला एक्सटेंशन, चुनाव बाद 7 दिन और रुकेंगे केंद्रीय बल
गुजरात में AAP संकट में, प्रदेश महामंत्री सागर रबारी ने छोड़ा पद
कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं से कराया अवगत
स्वास्थ्य मंत्रालय की चेतावनी—लाइफस्टाइल बीमारियां सबसे बड़ा खतरा
अब तक 1500 से ज्यादा पेड़ लगाकर पेश की मिसाल
पूरी रात जागकर जश्न मनाते रहे गांव वाले
छात्रों और युवाओं ने पेश किए नए स्टार्टअप आइडियाज
दो विदेशी और दो पाकिस्तानी कप्तान मैदान में आमने-सामने
बंगाल में सियासी हिंसा: मिताली बाग की कार पर हमला, सांसद और ड्राइवर घायल
विधानसभा के बाहर हाई-वोल्टेज ड्रामा: MLA ट्रैक्टर लेकर पहुंचे, पुलिस संग झूमाझटकी
राजनीति में बड़ा उलटफेर: राघव सहित 7 AAP सांसद BJP में, संजय सिंह की प्रतिक्रिया
गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलेगा पक्का घर
अंपायर के फैसले पर बहस करना माना जाता है अनुशासनहीनता