रिलायंस के नतीजों में दिखेगा कारोबार का संतुलन, जियो-रिटेल बने मजबूत स्तंभ
विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के नतीजे कमजोर रह सकते हैं। हालांकि कंपनी के दूरसंचार और रिटेल व्यवसायों में मजबूत वृद्धि से उसके ऑयल टू केमिकल्स (ओ2सी) सेगमेंट में कमजोरी की भरपाई हो सकती है। आरआईएल ने शुक्रवार को एक्सचेंजों को बताया कि कंपनी चौथी तिमाही के नतीजे 25 अप्रैल को पेश करेगी।
ब्लूमबर्ग के सर्वे के अनुसार 16 विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही के लिए 2.42 लाख करोड़ रुपये के समेकित राजस्व (सालाना आधार पर 2.5 फीसदी तक अधिक) और 10 विश्लेषकों ने शुद्ध समायोजित आय 18,517 करोड़ रुपये (एक साल पहले के मुकाबले 2.5 फीसदी कम) रहने का अनुमान जताया है।
देश का सबसे ज्यादा विविधता वाले समूह तीन मुख्य व्यवसायों – तेल से लेकर रसायन (ओ2सी), रिटेल और दूरसंचार से जुड़ा है। उसके ओ2सी व्यवसायों में में रिफाइनिंग, फ्यूल-रिटेलिंग और पेट्रोकेमिकल शामिल हैं। वह तेल एवं गैस अन्वेषण कारोबार से भी जुड़ी है।
जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने 7 अप्रैल की रिपोर्ट में कहा, ‘हमको उम्मीद है कि आरआईएल तिमाही आधार पर सपाट आय (18,400 करोड़ रुपये) दर्ज कर सकती है, क्योंकि उसकी ओ2सी आय डीजल क्रैक्स/पॉलिएस्टर मार्जिन पर दबाव से प्रभावित हो सकती है। लेकिन उसे तिमाही के दौरान रुपये में आई गिरावट का फायदा मिल सकता है।’
शोध फर्म का मानना है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में टैरिफ वृद्धि के कारण दूरसंचार एबिटा में अनुमानित 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि होगी, जबकि रिटेल व्यवसाय के एबिटा में 12 प्रतिशत की सालाना वृद्धि होगी, हालांकि मौजूदा अस्थिरता की वजह से रिटेल के बारे में अनुमान लगाना कठिन है।
जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों का कहना है कि मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाले समूह के लिए समेकित एबिटा सालाना आधार पर 2 फीसदी बढ़कर 43,409 करोड़ रुपये रह सकता है। चौथी तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 18,376 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो सालाना आधार पर 4 फीसदी कम है।
दूसरी तरफ, दौलत कैपिटल ने आरआईएल का एबिटा सालाना आधार पर 0.9 फीसदी तक घटकर 42,244 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया है जबकि कर बाद लाभ (पीएटी) एक साल पहले के मुकाबले 8.4 फीसदी घटकर 17,359 करोड़ रुपये रह सकता है।
आरआईएल के लिए चिंता का मुख्य विषय ओ2सी सेगमेंट का प्रदर्शन है क्योंकि इसमें कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, विशेष रूप से ईथेन की कीमतों में तिमाही आधार पर 28 प्रतिशत की वृद्धि तथा पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में गिरावट या स्थिरता के कारण मार्जिन पर दबाव पड़ने की आशंका है।
इसके विपरीत, रिलायंस जियो और रिटेल कारोबार मजबूत प्रदर्शन के लिए तैयार हैं। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने 6 अप्रैल के एक नोट में कहा कि डिजिटल सेवाओं से एबिटा में सालाना आधार पर 17 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है, जिसमें जुलाई 2024 की शुल्क बढ़ोतरी का प्रभाव शामिल है। ओ2सी सेगमेंट का एबिटा सालाना आधार पर 11 फीसदी घट सकता है। लेकिन तिमाही आधार पर इसमें 3 फीसदी का इजाफा होने की संभावना है। वहीं ईऐंडपी व्यवसाय का एबिटा सालाना आधार पर 6 फीसदी घट सकता है और तिमाही आधार पर इसमें 5 फीसदी की गिरावट आ सकती है।
पूरे वर्ष के आधार पर गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026 में आय की रफ्तार तेज हो सकती है, क्योंकि सभी सेगमेंट में वृद्धि से उसे मदद मिल सकती है।
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