अजय चंद्राकर ने गृहमंत्री विजय शर्मा पर दागे सवाल, पूछा- साइबर अपराध रोकने में आपकी क्या विशेषज्ञता है?
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र के चौथे दिन सदन में साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी का मुद्दा गूंजा. कुरुद विधानसभा से विधायक अजय चंद्राकर ने शुक्रवार को गृह मंत्री विजय शर्मा पर सवालों की बौछार कर दी. अजय चंद्राकर ने पूछा कि साइबर अपराध और डिजिटल गिरफ्तारी के मामलों से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस के पास क्या विशेषज्ञता है? इस पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि साइबर अपराध सिर्फ राज्य का विषय नहीं है। राज्य में नई सरकार बनने के बाद साइबर भवन का निर्माण किया गया। आधुनिक उपकरण लाए गए हैं।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पूछा कि यह अच्छी बात है कि उपकरण जुटा लिए गए हैं, लेकिन उन उपकरणों को चलाने वाले कितने विशेषज्ञ हैं? सदन में साइबर थाना खोलने की घोषणा की गई थी, क्या वह खुल गया है? गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पांच संभागीय रेंज के थानों को अपग्रेड कर साइबर थाना बनाया गया है। सभी थानों में साइबर सेल खोले जा रहे हैं. पांच विशेषज्ञों को लगाने की प्रक्रिया बढ़ाई गई है. विशेषज्ञ बाहर से नहीं आ सकते, जो मैनपावर है, उसमें से उनकी पहचान की जा रही है. राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भारतीय साइबर अपराध केंद्र से 129 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने गृह मंत्री से साइबर ठगी की रकम के साथ ही पीड़ितों को वापस की गई रकम पर सवाल किया। मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि 168 करोड़ रुपए की ठगी की रकम में से करीब 5 करोड़ 20 लाख रुपए वापस किए जा चुके हैं। गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा, डिजिटल गिरफ्तारी के 12 मामले सामने आए हैं। इन सभी मामलों में कार्रवाई की गई है। इस पर अजय चंद्राकर ने पूछा कि 1795 बैंक खाते चल रहे हैं। 921 खातों में ठगी की रकम वापस मिल गई, लेकिन ये खाते अभी तक बंद नहीं किए गए हैं। इसकी क्या वजह है? गृह मंत्री ने कहा कि ठगी की रकम एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर हो जाती है। शुरुआती खाता बंद कर दिया जाता है।
इस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि 722 साइबर ठगी करने वालों की पहचान की गई है, जिनमें से करीब तीन सौ के खिलाफ कार्रवाई की गई है। बाकी लोगों के खिलाफ कब कार्रवाई होगी? मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि पिछले साल 20 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का डिजिटल लेन-देन हुआ है। जर्मनी भी भारत के डिजिटल लेनदेन को अपना रहा है। सब्जी विक्रेताओं को भी डिजिटल लेनदेन के जरिए भुगतान किया जा रहा है।
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