‘सनातन विरोधियों पर वार’—राजा भैया का तीखा बयान
प्रतापगढ़: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों की गूँज अब उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भी सुनाई दे रही है। तमिलनाडु में सत्ताधारी दल डीएमके (DMK) की हार और अभिनेता विजय की पार्टी 'टीवीके' की निर्णायक बढ़त पर उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के प्रमुख रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कुंडा विधायक ने एम.के. स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन की चुनावी शिकस्त को 'सनातन धर्म' के अपमान का प्रतिफल बताया है।
"मिट गए सनातन को मिटाने का सपना देखने वाले"
राजा भैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा— "मिट गये सनातन को मिटाने का सपना देखने वाले।" अपनी इस बात को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उन्होंने 3 सितंबर 2023 का अपना वह पुराना पोस्ट भी रिट्वीट किया, जिसमें उन्होंने उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन धर्म की तुलना 'डेंगू' और 'मलेरिया' जैसी बीमारियों से किए जाने का कड़ा विरोध किया था। राजा भैया का यह रुख स्पष्ट करता है कि चुनावी नतीजों ने सनातन के मुद्दे पर चल रही बहस को एक नई ऊर्जा दे दी है।
उदयनिधि के विवादित बयान का दिखा असर
विदित हो कि साल 2023 में एक सम्मेलन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा था कि सनातन धर्म का केवल विरोध नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे जड़ से मिटा देना चाहिए। उस समय राजा भैया ने इसे हिंदुओं के प्रति 'नग्न घृणा' करार दिया था। अब तमिलनाडु के चुनावी नतीजों में डीएमके की हार के बाद राजा भैया ने इसे जनता का 'करारा जवाब' बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उदयनिधि के बयानों ने न केवल दक्षिण बल्कि उत्तर भारत के हिंदू मतदाताओं में भी गहरी नाराजगी पैदा की थी, जिसका खामियाजा अब डीएमके को भुगतना पड़ा है।
यूपी की राजनीति और राजा भैया का संदेश
राजा भैया द्वारा सुदूर दक्षिण के चुनावी नतीजों पर दी गई इस प्रतिक्रिया के गहरे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि इसके जरिए राजा भैया उत्तर प्रदेश में अपने हिंदुत्ववादी आधार को और अधिक विस्तार देना चाहते हैं। तमिलनाडु में 'इंडिया' गठबंधन के घटक दलों की हार को सनातन के मुद्दे से जोड़कर वे यूपी में भी यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि धर्म और संस्कृति के विरुद्ध की गई कोई भी टिप्पणी राजनीतिक पतन का कारण बन सकती है।
तमिलनाडु का नया समीकरण
गौरतलब है कि तमिलनाडु में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जहाँ अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने कांग्रेस के साथ मिलकर डीएमके के वर्चस्व को कड़ी चुनौती दी है। राजा भैया के इस हमले ने साबित कर दिया है कि आधुनिक राजनीति में क्षेत्रीय सीमाएं अब गौण हो चुकी हैं और एक राज्य के वैचारिक मुद्दे दूसरे राज्य की चुनावी बिसात को प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखते हैं।
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